
नई दिल्ली, 11 जनवरी। ईरान में 28 दिसंबर से सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ सड़कें आग उगल रही हैं। प्रदर्शन अब हिंसक रूप धारण कर चुके हैं, जिसमें 115 से अधिक मौतें हो चुकी हैं और 2000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि देश तख्तापलट की कगार पर है, जो बांग्लादेश, नेपाल और वेनेजुएला के हालिया घटनाक्रम से मिलता-जुलता लग रहा है।
जनता का गुस्सा महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक बेड़ियों और सत्ता के एकाधिकार से भरा है। युवा, महिलाएं और यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स आगे हैं। 60 घंटे से इंटरनेट-फोन सेवाएं ठप हैं, फिर भी आवाजें दब नहीं रही।
बांग्लादेश में शेख हसीना के खिलाफ छात्र आंदोलन ने तहलका मचा दिया था, जो हिंसा में बदल गया और सरकार गिरी। नेपाल का 2025 जेनजी आंदोलन सोशल मीडिया से संगठित होकर सत्ता परिवर्तन लाया। वेनेजुएला में अमेरिका ने मादुरो को ही न्यूयॉर्क ले जाकर हटाया, हमले किए – जनता ने जश्न मनाया।
अमेरिका ईरानी प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन कर रहा है, दमन पर हमले की धमकी दे रहा। सबूत भले न हों, लेकिन बयानबाजी संदेह बढ़ाती है। तेहरान बाहरी साजिश का रोना रोता है। खामेनेई ने वीडियो में कहा, ‘दुश्मनों ने 40 सालों में हर हथकंडा अपनाया – सैन्य, आर्थिक, सांस्कृतिक – लेकिन इस्लामिक रिपब्लिक मजबूत खड़ी है।’
भारत में ईरान दूतावास ने यह संदेश साझा किया। क्या ईरान में बड़ा उलटफेर होगा? मध्य पूर्व की नजरें तेहरान पर टिकी हैं।
