
11 जनवरी 1922 का दिन चिकित्सा जगत के लिए स्वर्णिम अध्याय है। कनाडा के टोरंटो में 14 वर्षीय लियोनार्ड थॉम्पसन को पहली बार इंसुलिन का इंजेक्शन दिया गया, जिसने मधुमेह जैसी घातक बीमारी पर काबू पाने का मार्ग प्रशस्त किया। पहले यह रोग लगभग मौत का ऐलान था।
उस समय डायबिटीज के मरीजों को कठोर भोजन प्रतिबंधों पर रखा जाता था, जो उन्हें कुपोषित बना देते थे। थॉम्पसन की हालत भी गंभीर थी। टोरंटो विश्वविद्यालय के डॉक्टर फ्रेडरिक बैंटिंग, चार्ल्स बेस्ट, जेम्स कॉलिप और जॉन मैकलियोड ने अग्न्याशय से इंसुलिन निकालने में सफलता पाई। कई विफलताओं के बाद शुद्ध इंसुलिन तैयार हुआ।
पहली खुराक में कुछ दुष्प्रभाव दिखे, लेकिन जल्द ही सुधार हुआ। थॉम्पसन के ब्लड शुगर कंट्रोल हो गया, स्वास्थ्य लौट आया। इस सफलता ने इंसुलिन को वैश्विक स्तर पर उपलब्ध कराया, लाखों जिंदगियां बचाईं।
यह घटना विज्ञान की विजय का प्रतीक है, जो आज भी नवाचार की प्रेरणा देती है। मधुमेह अब प्रबंधनीय बीमारी है, धन्यवाद उस ऐतिहासिक इंजेक्शन का।
