
प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हुई नारेबाजी की घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि संविधान के ऊपर कोई नहीं है। उनके इस बयान ने पूरे देश में चर्चा छेड़ दी है और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
जेएनयू कैंपस में हाल ही में संसद हमले की बरसी पर एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा कथित तौर पर उठाए गए राष्ट्र-विरोधी नारे इस विवाद का केंद्र बिंदु बने। वीडियो फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और सेडिशन के आरोप लगाए गए।
सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने अपने प्रवचन में स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘संविधान ही हमारा सर्वोच्च कानून है। न छात्र, न शिक्षक, न कोई विचारधारा इसके ऊपर हो सकती है।’ उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी ऊर्जा रचनात्मक कार्यों में लगाएं, न कि राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में।
महाराज ने जेएनयू की घटनाओं का ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को ज्ञान का केंद्र होना चाहिए, न कि राजनीतिक अराजकता का। 2016 की सेडिशन घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी प्रवृत्तियां लोकतंत्र के लिए खतरा हैं।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं तेज हैं। भाजपा ने महाराज के बयान का समर्थन किया, जबकि विपक्ष ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि महाराज का मत सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों से मेल खाता है।
इस बयान से जेएनयू प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। महाराज ने सुझाव दिया कि छात्रों के लिए संवैधानिक शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। उनके लाखों अनुयायी इस मुद्दे पर एकजुट हो रहे हैं।
अंत में, सद्गुरु रितेश्वर महाराज का संदेश स्पष्ट है- संविधान की मर्यादा बनाए रखें। यह बयान न केवल जेएनयू विवाद को नई दिशा देगा, बल्कि पूरे देश में राष्ट्रभक्ति की बहस को मजबूत करेगा।
