
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा है कि आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिलाओं के साथ बदसलूकी होने पर तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई जाए। यह फैसला जानवरों के प्रति करुणा और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करता है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सड़क पर घूमने वाले कुत्तों को दाना-पानी देना अपराध नहीं है, लेकिन इसके लिए किसी को गाली-गलौज या हिंसा का सहारा लेने का अधिकार नहीं। कई मामलों में महिलाओं को शाम के समय घरों के बाहर निशाना बनाया गया, जिसकी शिकायत पर पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी होगी।
यह आदेश उन घटनाओं पर आधारित है जहां आवासीय समाजों में रहने वाले लोग स्ट्रे डॉग्स को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर पशु प्रेमियों पर हमला करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि ऐसी शिकायतों को गंभीरता से लें और आरोपी के खिलाफ IPC की धाराओं में मुकदमा चलाएं।
देशभर में स्ट्रे कुत्तों की बढ़ती संख्या एक बड़ी समस्या बनी हुई है। कोर्ट ने नगर निगमों को sterilization और vaccination अभियान तेज करने का आदेश दिया ताकि भविष्य में ऐसी टकराव कम हों।
यह फैसला महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा देता है और समाज में सह-अस्तित्व को बढ़ावा देता है। पशु अधिकार संगठन इसे ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं।
