
कोलकाता हाईकोर्ट में सोमवार को बड़ा ड्रामा हुआ जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आई-पैक छापेमारी की जांच में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाते हुए याचिका दायर की। एजेंसी का दावा है कि सीएम के सार्वजनिक बयानों और राजनीतिक दबाव ने मनी लॉन्ड्रिंग के इस संवेदनशील केस को खतरे में डाल दिया है।
मामला तब गरमाया जब ईडी ने पिछले सप्ताह आई-पैक के कई ठिकानों पर धावा बोला। यह फर्म टीएमसी की चुनावी रणनीतियों के लिए जानी जाती है। जब्त दस्तावेजों से करोड़ों के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा हुआ, जो शायद चुनावी खर्च के लिए शेल कंपनियों के जरिए ट्रांसफर किए गए।
ईडी के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि ममता बनर्जी का टीवी पर ‘राजनीतिक बदले की कार्रवाई’ बताकर दिए बयान गवाहों को डराने का प्रयास है। याचिका में कोर्ट से राजनीतिक नेताओं पर चल रही जांच पर टिप्पणी रोकने के निर्देश की मांग की गई है।
टीएमसी नेताओं ने इसे ‘बेबुनियाद बीजेपी प्रोपगैंडा’ करार दिया। पार्टी के डेरेक ओ’ब्रायन ने ईडी के कदम के समय पर सवाल उठाए। विपक्षी दल बीजेपी और सीपीआई(एम) ने पूर्ण न्यायिक जांच की मांग की।
वकीलों का मानना है कि यह केस लंबा चलेगा और केंद्र-राज्य जांच तंत्र पर असर डालेगा। हाईकोर्ट ने दो दिन बाद अगली सुनवाई तय की है। यह मामला बंगाल की सियासत को नई ऊंचाई दे सकता है।
