
देशभर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और हादसों ने आम जनजीवन को दहशत में डाल दिया है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। बुधवार को हुई सुनवाई में अदालत ने नगर निगमों और राज्य सरकारों की लापरवाही पर तीखा प्रहार किया। गुरुवार को मामले की अगली सुनवाई निर्धारित है, जहां महत्वपूर्ण फैसले की उम्मीद है।
याचिकाओं में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु समेत कई शहरों से भयावह घटनाओं का जिक्र किया गया। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं। कोर्ट ने पशु जन्म नियंत्रण नियमों के सख्त पालन का आदेश दिया, जिसमें बड़े पैमाने पर नसबंदी और टीकाकरण अभियान शामिल हैं।
जस्टिस बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि मानव जीवन की रक्षा सर्वोपरि है। राज्यों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। जानकारों का मानना है कि यह हस्तक्षेप राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत बदलाव लाएगा।
आवारा कुत्तों की समस्या के मूल कारणों जैसे अपर्याप्त आश्रय और फंडिंग पर भी चर्चा हुई। गुरुवार को कोर्ट नए दिशानिर्देश जारी कर सकता है, जो पूरे देश में सड़कों को सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होंगे।
