
पश्चिम बंगाल में बंगाली मीडियम स्कूलों के छात्र लंबे समय से अंग्रेजी भाषा के डर से जूझ रहे हैं। अंग्रेजी बोलने, लिखने और समझने में आत्मविश्वास की कमी के कारण कई छात्र अपनी पढ़ाई में पिछड़ जाते हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए पश्चिम बंगाल काउंसिल ऑफ हायर सेकेंडरी एजुकेशन (WBCHSE) ने एक अनोखी पहल शुरू की है। नए साल की शुरुआत में कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित विद्यासागर भवन में 5 से 9 जनवरी तक विशेष वर्कशॉप का आयोजन किया जा रहा है।
इस पांच दिवसीय ट्रेनिंग कैंप में राज्य भर के 150 से अधिक बंगाली मीडियम स्कूलों के लगभग 2000 छात्र भाग लेंगे। कक्षा 6 के ये छात्र, जिनकी दूसरी भाषा अंग्रेजी है, को हर दिन दो सेशनों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रत्येक सेशन में करीब 200 छात्र शामिल होंगे। WBCHSE ने पाया है कि बंगाली मीडियम के छात्रों को अंग्रेजी में झिझक और भय महसूस होता है, जो उनके उच्च शिक्षा और करियर के अवसरों को प्रभावित करता है।
राज्य शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंग्रेजी भाषा में निपुणता आज के प्रतिस्पर्धी दौर में अनिवार्य है। इस वर्कशॉप का उद्देश्य छात्रों के मन से अंग्रेजी का डर दूर करना और उनकी कम्युनिकेशन स्किल्स को मजबूत बनाना है। पहले चरण में नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, हावड़ा और कोलकाता के कुछ स्कूलों के छात्रों को चुना गया है। WBCHSE की सेक्रेटरी प्रियदर्शिनी मल्लिक ने कहा, ‘यह पहल बंगाली मीडियम छात्रों में अंग्रेजी आत्मविश्वास जगाने के लिए है। इसे धीरे-धीरे पूरे राज्य में विस्तारित किया जाएगा।’
यह वर्कशॉप न केवल छात्रों को अंग्रेजी भाषा सीखने में मदद करेगी, बल्कि उनके भविष्य को उज्जवल बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। बंगाली मीडियम शिक्षा, अंग्रेजी ट्रेनिंग, पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग की यह पहल सराहनीय है।
