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पेट्रोल-डीजल के घटे दामों पर बोली पब्लिक- राहत नहीं, राजनीतिक स्टंट है, उठाया सवाल- कब कम होगे रसोई गैस के दाम?

सुनील कुमार साकेत, आगरा
दिवाली की पूर्व संध्या पर पेट्रोल और डीजल की दामों में आई गिरावट के बाद भी आम लोगों में कुछ खास उत्साह नहीं है, लेकिन उम्मीद है कि पेट्रोल और डीजल के दाम और ज्यादा कम हों। ताकि बढ़ती मंहगाई से कुछ राहत मिल सके। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल जीएसटी के दायरे में आ जाए तो ट्रांसपोर्ट असोसिएशन को भी राहत मिल सकेगी। हालांकि अभी भी उत्तर प्रदेश में 100 रुपये से अधिक कीमत में पेट्रोल बेचा जा रहा है जबकि डीजल 86.88 पैसे की दर से बिक रहा है। कुछ लोग इसे राजनैतिक स्टंट करार दे रहे हैं।

सिकंदरा नगर के रहने वाले दीपक कुशवाह एक राइड कंपनी में काम करते हैं। वह करीब एक दिन में 150 किमी तक अपनी बाइक चलाते हैं और लोगों को उनके डेस्टिनेशन तक पहुंचाते हैं। उनका कहना है कि पेट्रोल पर पांच रुपये कम करने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। सरकार को कम से कम पेट्रोल के दाम 80 से 85 रुपये तक रखने चाहिए। इसके बाद ही कुछ राहत दिखाई देगी।

यमुनापार की रहने वालीं मीनाक्षी भार्गव का कहना है कि मंहगाई आसमान छू रही है। यह सब डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण ही हो रहा है। चुनाव नजदीक हैं। सरकार ने मामूली राहत देकर जनता को झूठा प्रलोभन दिया है।

क्या कहते हैं ट्रांसपोर्ट कारोबारी
आगरा महानगर असोसिएशन के महासचिव मुकेश कुमार गर्ग कहते हैं कि पेट्रोल के दाम 25 से 30 रुपये कम होने चाहिए तब जाकर कुछ राहत मिल सकेगी। ट्रांसपोर्ट कंपनियां नो प्रॉफिट और नो लॉस में चल रही हैं। जीएसटी लागू होने के बाद से ही उनकी सरकार से पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग चल रही है, लेकिन सरकार सुनवाई नहीं कर रही है। बाजार में बढ़ता कॉम्पिटीशन ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को खतरे में डाल रहा है।

गैस सिलेंडर पर कब होगी कमी
बढ़ती मंहगाई के कारण विरोध झेल रही बीजेपी सरकार से अब लोगों की उम्मीदें बढ़ गईं हैं। पेट्रोल और डीजल के दामों में आई गिरावट के बाद गैस सिलेंडर के दामों में कटौती होने के आसार बने हैं। ट्रांस यमुना कालोनी की रहने वाली हेमलता यादव का कहना है कि मंहगाई का सबसे ज्यादा असर रसोई पर पड़ा है। एक हजार रुपये का गैस सिलेंडर लेकर घर चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकार को गैस सिलेंडर के दामों में भी कमी करनी होगी।