Jungle News: नेवले भी अंदर से सांप जैसे ही हैं, इसील‍िए कोबरा का जहर हो जाता है बेअसर - Lok Shakti.in

Lok Shakti.in

Nationalism Always Empower People

Jungle News: नेवले भी अंदर से सांप जैसे ही हैं, इसील‍िए कोबरा का जहर हो जाता है बेअसर

Jungle News: नेवले भी अंदर से सांप जैसे ही हैं, इसील‍िए कोबरा का जहर हो जाता है बेअसर

बदायूं: बदायूं में सांप और नेवले ( Mongoose Vs Cobram) की जन्‍मजात दुश्‍मनी फिर देखने में आई और वही हुआ जो हमेशा होता है। यानी, जीत नेवले की हुई। इस घटना का दुखद पक्ष यह था कि नेवले ने घात लगाकर नाग-नागिन के जोड़े में से नागिन को मार डाला। अकेला बचा जख्‍मी नाग सिर्फ फन उठाए फुंफकारता रहा। पर ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर क्‍यों नेवला कोबरा जैसे सांप के जहर (cobra snake venom) से बच निकलता है? उसके पास ऐसी क्‍या खूबी है?

कोबरा या काले नाग का जहर बहुत ताकतवर होता है। उसके जहर में इतनी ताकत होती है कि उसकी एक बाइट या एक बार डंसने में जितना जहर निकलता है उससे 20 व्‍यस्‍क इंसानों की मौत हो सकती है। यह भी कहा जाता है कि जहर की यह मात्रा एक हाथी को मौत की नींद सुलाने के लिए काफी है।

नेवला जहर से कैसे बचता है
तब छोटी बिल्‍ली के आकार वाला नेवला इस जहर से कैसे बचा रहता है। कुछ लोगों का कहना है कि नेवला एक खास जड़ी-बूटी जानता है और लड़ाई के बीच में अगर सांप उसे काट ले तो वह जल्‍दी से जाकर वह बूटी खा आता है और स्‍वस्‍थ होकर फिर से सांप से मोर्चा लेने लगता है।

सांप का जहर दो तरह का होता है
लेकिन असलियत कुछ और है। नेवले की जीत के पीछे दो वजहें हैं। लेकिन उन पर चर्चा से पहले हम जान लें कि सांप का जहर किस तरह असर करता है। प्राणिविज्ञानियों के मुताबिक, सांप का जहर दो किस्‍म का होता है, न्‍यूरोटॉक्सिक और हीमोटॉक्सिक। न्‍यूरोटॉक्सिक जहर जब शिकार के शरीर में जाता है तो उसकी मांसपेशियों को लकवा मार जाता है और उसके अहम अंग काम करना बंद कर देते हैं, जल्‍द ही मौत हो जाती है। वहीं हीमोटॉक्सिक जहर के कारण शिकार के खून में ऑक्सिजन को ले जाने की क्षमता खत्‍म हो जाती है और वह सांस के लिए तड़पकर मर जाता है।

सांप का जहर इन चीजों से बनता है
सांप का जहर एंजाइम, कई प्रोटीन, लिपिड, एमीन, कार्बोहाइड्रेट वगैरह का घोल होता है। कोबरा सांप के जहर में मौजूद एल्‍फा न्‍यूरो टॉक्सिन शिकार की मांसपेशियों पर मौजूद रिसेप्‍टर से इस तरह जुड़ जाता है कि फिर दिमाग से मांसपेशियों का संपर्क कट जाता है और लकवा मार जाता है।

नेवला अंदर से सांप जैसा है
अब आता है सबसे रोचक तथ्‍य। नेवले के शरीर की संरचना कुछ ऐसी होती है कि उसके शरीर में ऐसे ग्‍लाइकोप्रोटीन होते हैं जो सांप के इस एल्‍फा न्‍यूरो टॉक्सिन के साथ जुड़कर उन्‍हें नाकाम कर देते हैं और उसे लकवा नहीं होता। वैज्ञानिकों ने देखा कि खुद सांप के शरीर में भी कुछ इसी तरह के तत्‍व होते हैं इसीलिए अगर कोई सांप खुद को काट ले तो उसकी मौत अपने जहर से नहीं होती। तो देखा जाए नेवले भी अंदर से सांप जैसे ही हैं।

ज्‍यादा जहर पहुंच जाए तो?
पर ऐसा भी नहीं है कि नेवले इस जहर से पूरी तरह बेअसर हों। जहर की ज्‍यादा मात्रा उनके शरीर में चली जाए तो वह कुछ देर के लिए बेसुध हो जाते हैं। पर थोड़ी ही देर में फिर होश में आकर पूरी तरह स्‍वस्‍थ हो जाते हैं और सांप पर फिर हमला करने लगते हैं।

दूसरी ताकत, फुर्ती और सही रणनीति
इसलिए नेवले की जीत में दो चीजें काम करती है, पहली, उसके शरीर की आंतरिक संरचना यानि अंदर से सांप जैसा होना, और दूसरी, उसकी फुर्ती जिसके दम पर वह सांप को कम से कम डंसने का मौका देता है और अपने नुकीले दांतों और पंजों से सांप की गर्दन को काटकर अलग कर देता है। नेवला सबसे पहले सांप के फन पर ही हमला करता है ताकि उसका सिर काटकर अलग कर दे। तो यह है नेवले के कोबरा की लड़ाई में अधिकांश मौकों पर विजेता होने का राज। मतलब नेवले भी एक तरह से सांप ही हैं तभी जहर से बेअसर हैं।