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Editorial:जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में भारत ने लगाई दो स्थानों की छलांग

25-11-2022

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दुनियाभर में भारत की साख मजबूत हुई है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की तमाम रैंकिंग में सुधार हुआ है। जलवायु सुरक्षा के मामले में भारत ने एक बार फिर बेहतर प्रदर्शन किया है। कॉप 27 में जारी जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक(CCPI -2023) में भारत दो स्थानों की छलांग लगाकर 8वीं रैंक हासिल किया है। पिछले साल भारत की 10वीं रैंकिंग थी। वहीं जलवायु परिवर्तन के प्रदर्शन के आधार पर भारत को विश्व के शीर्ष 5 देशों में शामिल किया गया है, जबकि G20 देशों में भारत टॉप पर है। सीसीपीआई की इस रिपोर्ट में भारत से ऊपर चार देश है। इनमें डेनमार्क को चौथे, स्वीडन को पांचवें, चिली को छठे और मोरक्को को सातवें स्थान पर रखा गया है। किसी भी देश को पहला, दूसरा और तीसरा स्थान नहीं दिया गया है।

सीसीपीई की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक,जलवायु सुरक्षा के मामले में चीन और आमेरिका का प्रदर्शन खराब रहा है। जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में जहां चीन 13 पायदान खिसककर 60 देशों की सूची में 51 वें स्थान पर पहुंच गया है, वहीं अमेरिका तीन पायदान चढ़कर 52 वें स्थान पर है। वहीं जलवायु परिवर्तन सूचकांक में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देश की बात करें तो इसमें ईरान, सऊदी अरब और कजाकिस्तान आखिरी तीन में शामिल है।

सीसीपीई की रिपोर्ट के मुताबिक,भारत 2030 तक उत्सर्जन लक्ष्य को पूरा करने के लिए सही ट्रैक पर है। भारत ने ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन और ऊर्जा उपयोग करने की श्रेणी में उच्च रैंकिंग हासिल की है, जबकि जलवायु नीति और नवीकरणीय ऊर्जा के लिए भारत ने मध्यम रेटिंग प्राप्त की है। नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों के लिए भारत दुनिया के अन्य देशों की तुलना में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के कार्यक्रमों को तेजी से लागू कर रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब G 20 देशों की अध्यक्षता करेगा और दुनिया को जलवायु शमन नीतियों में ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों को दिखाने का एक उपयुक्त समय होगा।

भारत के बिजली मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत अब जी-20 की अध्यक्षता ग्रहण करेगा और अपनी जलवायु शमन नीतियों से दुनिया का मार्गदर्शक बनेगा। वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच में स्थान पाना यह दर्शाता है कि भारत अब विश्व में किसी भी देश की तुलना में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के कार्यक्रमों को बहुत तेज गति से लागू कर रहा है। केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि भारत की सीसीपीआई श्रेणी महामारी और कठिन आर्थिक समय के बावजूद वैश्विक जलवायु परिवर्तन का समाधान निकालने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा दिखाए गए नेतृत्व का प्रमाण है। गौरतलब है कि मोदी सरकार बनने के समय साल 2014 में CCPI में भारत 31वें स्थान पर था। 

जर्मनी की जर्मन वॉच, न्यू क्लाइमेट इंस्टीट्यूट और क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क इंटरनेशनल संस्था द्वारा जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (CCPI) रिपोर्ट जारी की जाती है। इसकी शुरुआत 2005 में हुई। यह रिपोर्ट हर साल जारी होती है। सीसीपीआई 59 देशों और यूरोपीय संघ के जलवायु सरंक्षण प्रदर्शन को ट्रैक करने के लिए एक स्वतंत्र निगरानी तंत्र है। इसके द्वारा जलवायु संरक्षण प्रयासों और अलग-अलग देशों द्वारा की गई प्रगति का मूल्यांकन 14 संकेतकों के साथ चार श्रेणियों में किया जाता है, जिनमें ग्रीन हाउस गैस(GHG) उत्सर्जन (40 प्रतिशत), नवीकरणीय ऊर्जा (20 प्रतिशत), ऊर्जा उपयोग (20 प्रतिशत) और जलवायु नीति (20 प्रतिशत) शामिल है।

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