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नेतरहाट आवासीय विद्यालय: खरीदारी में गोलमाल!

नेतरहाट आवासीय विद्यालय: खरीदारी में गोलमाल!

Satya Saran Mishra

Ranchi : झारखंड का ख्याति प्राप्त शिक्षण संस्थान नेतरहाट आवासीय विद्यालय इन दिनों विवादों में है. यहां रह कर पढ़ाई करनेवाले बच्चों के भोजन के लिए खरीदी जानेवाली सामग्रियां बाजार दर से डेढ़-दो गुना ऊंची दर पर खरीदी जा रही हैं. स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों ने ही इस तरह की खरीदारी पर सवाल उठाते हुए उच्चाधिकारियों से शिकायत की है. ऊंची दर पर खरीदारी के लिए स्कूल के प्राचार्य को जिम्मेवार ठहराया है. हालांकि बाजार दर से ऊंची कीमत पर खरीदारी को प्राचार्य जायज ठहराते हैं. कहते हैं कि नेतरहाट पठार पर है. वहां खाद्य सामग्रियां महंगे दाम पर ही मिलती हैं, इसलिए ज्यादा कीमत पर खाद्य सामग्रियां व जरूरत के अन्य सामान खरीदना मजबूरी है. लेकिन शिक्षक-कर्मचारी इसे झुठलाते हैं. कहते हैं कि खाद्य सामग्रियां यहां के बाजार में भी कम कीमत पर उपलब्ध हैं, लेकिन पता नहीं क्यों दोगुनी-तिगुनी कीमत पर खरीदी जा रही है. इससे खरीदारी घोटाले की बू आती है. जांच हो तो कई और खुलासे भी हो सकते हैं.

38 का आटा 61 रुपये में खरीद रहे

जो आशीर्वाद आटा रिटेल मार्केट में 38 रुपए प्रति किलो बिक रहा है, उसे स्कूल प्रबंधन 61 रुपए प्रति किलो की दर से खरीद रहा है. वहीं 120-130 रुपए प्रति किलो के दर से बिकने वाली अरहर दाल 175 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी जा रही है. इसी तरह मसुर दाल 155 रुपए प्रति किलो, उड़द दाल बरी 1200 रुपए प्रति किलो और तिलकुट 600 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी जा रही है. जबकि इन खाद्य समाग्रियों की कीमत बाजार में डेढ़-दो गुना कम है.

विवाद, आरोप-प्रत्यारोप और केस-मुकदमा

नेतरहाट आवासीय विद्यालय बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए ख्याति प्राप्त है. लेकिन इन दिनों यह शिक्षा का मंदिर न होकर राजनीति का अखाड़ा बन गया है. विवादों से घिर गया है. शिक्षक-कर्मचारी और प्राचार्य आमने-सामने हैं. आरोप-प्रत्यारोप के साथ केस-मुकदमा का दौर भी शुरू हो चुका है. स्कूल के ऑर्ट्स टीचर अतुल रंजन एक्का ने 15 जनवरी 2022 को लातेहार के एससी-एसटी थाना में प्राचार्य डॉ संतोष कुमार सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करायी है. आरोप लगाया है कि प्राचार्य ने दुर्भावना से ग्रसित होकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है और जातिसूचक शब्द का भी प्रयोग किया है. साथ ही नौकरी से भी हटाने की धमकी दी है.

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कर्मचारियों ने भी की है प्राचार्य की शिकायत

इससे पहले फरवरी 2020 में भी स्कूल के 9 कर्मचारियों ने विद्यालय संचालन समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर प्राचार्य पर कुछ शिक्षकों को प्रताड़ित करने और जातिसूचक शब्द का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था. डॉ संतोष पर लगे आरोपों का मामला कोर्ट पहुंच चुका है और मामले की सुनवाई भी चल रही है. आरोप लगाने वाले और आरोपी सभी स्कूल में अभी कार्यरत हैं.

स्कूल में तनाव का माहौल, बच्चों की पढ़ाई बाधित

स्कूल में तनाव का माहौल बना हुआ है. इससे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है. स्कूल संचालन समिति का कार्यकाल भी 2020 में समाप्त हो गया है. उसके बाद से नई कमेटी नहीं बनी है. इस वजह से इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं हो पा रहा है. उधर 16 नवंबर 2022 को ऑल इंडिया आदिवासी विकास परिषद ने मामले को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई), झारखंड हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस, गर्वनर, सीएम, जिला प्रशासन समेत कई अधिकारियों को पत्र लिखकर पीड़ित शिक्षक को न्याय दिलाने की गुहार लगायी है.

प्राचार्य की सफाई…

काम करते नहीं, कारण पूछा, तो कर दिया केस :  प्राचार्य डॉ संतोष कुमार सिंह ने कहा कि उनपर लगे आरोप गलत और बेबुनियाद हैं. अतुल रंजन एक्का को उन्होंने कई बार जिम्मेवारी सौंपी थी, जिसे पूरा करने में वे नाकाम रहे थे. कई बार काम देने पर कोई न कोई बहाना बना दिया करते थे. इसे लेकर उन्हें एक-दो बार शो-कॉज नोटिस दिया गया था, जिससे नाराज होकर उन्होंने झूठा आरोप लगा दिया और लातेहार थाने में केस कर दिया. जब स्कूल में प्रबंधन समिति थी, तब उन्हें समझाया भी गया था.

आरोप तो लगाया, पर गवाह नहीं ला पा रहे : प्राचार्य ने कहा कि वे चाहते हैं कि मामले की एक बार अच्छे तरीके से जांच हो जाती, तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता. स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे और काम करने वाले (शिक्षक-कर्मचारी) 95 फीसदी जनजाति समाज से हैं. उन्होंने कभी भी किसी की जाति को लेकर कोई कमेंट नहीं किया है. अतुल रंजन तो गवाह भी नहीं पेश कर पा रहे हैं कि किसके सामने जातिसूचक शब्द का प्रयोग किया गया.

गोपनीयता का हनन हो रहा है

डेढ़ गुना अधिक दर पर खाद्य सामग्रियां खरीदने को लेकर प्राचार्य ने कहा कि इस तरह की चीजें अगर बाहर आती हैं, तो ये गोपनीयता का हनन है. खरीदारी के लिए स्कूल में कमेटी बनी हुई है, जिसमें 7-8 लोग हैं. टेंडर निकलने के बाद टेंडर कमेटी के अप्रूवल पर ही दुकानदार का चयन किया गया था. हालांकि जो दर निर्धारित की गयी थी, बाद में उसे कम कर दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि पठारी क्षेत्र होने के कारण सामग्रियां महंगे दाम में ही उपलब्ध है, इसलिए ज्यादा कीमत पर खरीदनी ही पड़ती है.

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