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BSP सांसद अतुल राय रेप के आरोप से बरी, 3 साल से जेल में थे बंद, MP-MLA कोर्ट ने साक्ष्यों के आभाव में दी राहत

BSP सांसद अतुल राय रेप के आरोप से बरी, 3 साल से जेल में थे बंद, MP-MLA कोर्ट ने साक्ष्यों के आभाव में दी राहत

मऊ: मऊ (Mau) के घोसी लोकसभा क्षेत्र के बसपा सांसद अतुल राय (BSP MP Atul Rai) को रेप के मामले में एमपी एमएलए कोर्ट के अपर जिला न्यायाधीश ने शनिवार को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है। एमपी एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) के एडिशनल जिला न्यायाधीश सियाराम चौरसिया ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम सुनवाई की थी। बसपा सांसद और रेप मामले में आरोपी अतुल राय पिछले 3 साल से प्रयागराज के नैनी जेल में बंद हैं।

अतुल राय को अप्रैल 2019 में बसपा ने घोसी लोकसभा से अपना प्रत्याशी घोषित किया था, जिसके बाद से अतुल राय लगातार विवादों में घिरे रहे। 1 मई 2019 को बलिया की रहने वाली युवती ने अतुल राय के ऊपर रेप का आरोप लगाते हुए वाराणसी के लंका थाने में केस दर्ज कराया था। 22 जून 2019 को अतुल राय ने वाराणसी कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था।

2019 में अतुल राय निर्वाचित हुए सांसद
इसी बीच लोकसभा 2019 के चुनाव परिणाम में घोसी लोकसभा क्षेत्र से अतुल राय बसपा से सांसद निर्वाचित हुए थे। जानकारी के मुताबिक बसपा से टिकट मिलने के बाद ही अतुल राय के ऊपर वाराणसी के यूपी कॉलेज से ग्रेजुएशन कर रही बलिया निवासी युवती ने उनके ऊपर रेप का केस दर्ज कराया था।

परेशान होकर पीड़िता और उसके साथी ने किया था आत्मदाह
16 अगस्त 2021 को पीड़ित युवती और उसके एक साथी ने अपने ऊपर लगने वाले फर्जी मुकदमों से परेशान होकर सुप्रीम कोर्ट के बाहर आत्मदाह कर लिया था। इसके बाद दोनों को गंभीर हालत में दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहां 9 दिनों के बाद पीड़ित युवती और उसके साथी की दर्दनाक मौत हो गई थी।

डीजी और एडीजे को सौंपी गई थी जांच
आत्मदाह की इस घटना की जांच उत्तर प्रदेश सरकार ने डीजी और एडीजे को सौंपी थी। तत्कालीन जांच अधिकारी भेलूपुर सीओ अमरेश सिंह बघेल की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया था। हालांकि शनिवार को वाराणसी एमपी एमएलए कोर्ट के अपर जिला न्यायाधीश सियाराम चौरसिया ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से रेप के आरोपी बसपा सांसद अतुल राय को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया। एमपी एमएलए के स्पेशल कोर्ट के इस निर्णय के बाद से तमाम अटकलों पर विराम लगता नजर आ रहा है।
रिपोर्ट – वेद नारायण मिश्रा
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