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अनुप्रिया पटेल के अपना दल को चुनाव आयोग ने दिया स्टेट पॉलिटिकल पार्टी का दर्जा, जानिए क्या होगा फायदा

अनुप्रिया पटेल के अपना दल को चुनाव आयोग ने दिया स्टेट पॉलिटिकल पार्टी का दर्जा, जानिए क्या होगा फायदा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीतिक पार्टी अपना दल (एस) को चुनाव आयोग ने स्टेट पॉलिटिकल पार्टी (Apna Dal S State Political Party) का दर्जा दे दिया है। विधानसभा चुनाव 2022 में प्रदर्शन के आधार पर यह दर्जा दिया गया है। चुनाव आयोग (Election Commission) की ओर से इस संबंध में पत्र जारी कर दल को जानकारी दी गई है। आयोग की ओर से कहा गया है कि आम चुनाव की समीक्षा के बाद देखा गया है कि अपना दल (एस) ने निर्धारित शर्तों को पूरा किया गया है। चुनाव आयोग की ओर से जारी चिट्‌ठी को अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) ने ट्वीट कर अपने कार्यकर्ताओं को यह खुशखबरी दी है। अनुप्रिया पटेल ने पार्टी को राज्यस्तरीय दर्जा दिए जाने की जानकारी ट्वीट कर दी।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद, छत्रपति शाहू जी महाराज और महात्मा ज्योतबा फुले की प्रेरणा से यह सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के विचारों को आत्मसात करने और डॉ. सोनेलाल पटेल के त्याग और संघर्ष का यह परिणाम है। अपना दल (एस) की ओर से कहा गया कि देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राज्यस्तरीय पार्टी के तौर पर पार्टी को चुनाव आयोग ने मान्यता दे दी है। यह उपलब्धि पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों की त्याग और परिश्रम का परिणाम है। पार्टी ने सभी को इसके लिए बधाई दी है।

केंद्र में मंत्री हैं अनुप्रिया पटेल
अनुप्रिया पटेल केंद्र सरकार में मंत्री हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन किया। एनडीए के साथ चुनाव लड़ने के बाद अपना दल का प्रभाव यूपी में लगातार बढ़ा है। लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में पार्टी का प्रदर्शन ठीक रहा। वहीं, विधानसभा चुनाव 2017 और 2022 में अपना दल (एस) मजबूत होती दिखी है। इसी कारण उसके राज्यस्तरीय राजनीतिक दल की दावेदारी मजबूत हो गई थी। अनुप्रिया पटेल ने चुनाव आयोग के फैसले को पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम बताया है।

ऐसे मिलता है किसी भी दल को स्टेट पॉलिटिकल पार्टी का दर्जा
भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के प्रावधानों के तहत अपना दल (एस) को यूपी में एक राज्य पार्टी के रूप में मान्यता प्रदान की है। अपना दल (एस) अभी तक एक पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी के रूप में चुनावी मैदान में उतरती रही है। आयोग की ओर से कहा गया कि पार्टी ने चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968 के पैरा 6ए में निर्धारित शर्तों को पूरा किया है। आइए जानते हैं कि वह शर्तें क्या हैं :

अगर किसी दल ने राज्य की विधानसभा के लिए हुए चुनावों में कुल सीटों का 3 प्रतिशत या 3 सीटें जो भी अधिक हो, प्राप्त किया हो।लोकसभा के लिए हुए आम चुनाव में दल ने राज्य के लिए निर्धारित प्रत्येक 25 लोकसभा सीटों में 1 सीट पर जीत दर्ज की हो।राज्य में हुए लोकसभा या विधानसभा के चुनावों में दल ने कुल वैध मतों के 6 प्रतिशत मत प्राप्त किए हों। इसके अलावा पार्टी ने एक लोकसभा सीट या 2 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की हो।राज्य में लोकसभा या विधानसभा के लिए हुए चुनावों में दल ने कुल वैध मतों के 8 प्रतिशत मत प्राप्त किए हों।
शर्त पूरा करने पर मिली है पार्टी को मान्यता
चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित शर्त को पूरा करने के आधार पर अपना दल (एस) को राज्यस्तरीय पार्टी की मान्यता प्रदान की गई है। यूपी चुनाव 2022 में अपना दल (एस) ने 17 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 12 पर जीत हासिल की थी। वहीं, 5 सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे। इसका लाभ पार्टी को मिल गया है। अब राज्यस्तरीय पार्टी बनने के बाद अपना दल (एस) के सामने स्थायी चुनाव चिह्न चुनने का विकल्प मिल जाएगा। पार्टी की ओर से आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध फ्री सिंबल लिस्ट में से एक सिंबल वरीयता का प्रस्ताव दिया जा सकता है।

इसके अलावा पार्टी आयोग के विचार के लिए तीन नए सिंबल डिजाइन और ड्राइंग के साथ प्रस्ताव के बारे प्रस्ताव भेज सकती है। आयोग की ओर से इस संबंध में पार्टी को जानकारी दी गई है। फ्री सिंबल लिस्ट आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। पार्टी की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद चुनाव आयोग की ओर से इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।

राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों को मिलने वाले फायदे

अगर किसी पंजीकृत दल को राज्‍य स्‍तरीय दल की मान्यता मिलती है तो उसे संबंधित राज्‍य में अपने उम्‍मीदवारों को दल के लिये सुरक्षित चुनाव चिन्ह आवंटित करने का विशेषाधिकार मिल जाता है।यदि किसी दल को राष्‍ट्रीय दल का दर्जा हासिल है तो उसे पूरे भारत में अपने उम्‍मीदवारों को दल के लिए सुरक्षित चुनाव चिन्‍ह आवंटित करने का विशेष अधिकार प्राप्‍त मिलता है।मान्‍यता प्राप्‍त राष्‍ट्रीय या राज्‍यस्‍तरीय उम्‍मीदवारों को नामांकन-पत्र दाखिल करते समय सिर्फ एक ही प्रस्‍तावक की जरूरत होती है।इसके अलावा उन्‍हें मतदाता सूची में संशोधन के समय वोटर लिस्ट के दो सेट मुफ्त पाने का अधिकार होता है। आम चुनाव के दौरान उनके उम्‍मीदवारों को भी मतदाता सूची का एक सेट फ्री मिलता है।इसके अलावा आम चुनाव के दौरान उन्‍हें आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रचार के प्रसारण की सुविधा मिलती है।ऐसे राजनीतिक दलों को आम चुनाव के दौरान अपने स्‍टार प्रचारक नामित करने की सुविधा मिलती है।एक मान्‍यता प्राप्‍त राष्‍ट्रीय या राज्‍य स्‍तरीय दल अपने लिये अधिकतम 40 स्‍टार प्रचारक रख सकता है, जबकि एक गैर मान्‍यता प्राप्‍त पंजीकृत दल अधिकतम 20 स्‍टार प्रचारक ही रख सकता है। इन स्‍टार प्रचारकों की यात्रा का खर्च उस उम्‍मीदवार या दल के खर्च में नहीं जोड़ा जाता है, जिसके पक्ष में ये प्रचार करते हैं।

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