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डिजिटल इंडियाः ट्वीटर एकाउंट @drvknarayan से मरीजों को इलाज की उम्मीदें, मंत्री को भी रहती है आशा

डिजिटल इंडियाः ट्वीटर एकाउंट @drvknarayan से मरीजों को इलाज की उम्मीदें, मंत्री को भी रहती है आशा

Saurav Shukla

Ranchi: डिजिटल इंडिया के इस युग में ट्वीटर ने क्रांति का रुख अख्तियार कर लिया है. आम और खास, किसी भी समस्या के समाधान या फिर मद्द के लिए ट्वीटर का सहारा लेते हैं. लेकिन इन दिनों झारखंड और खासकर रांची के @drvknarayan की चर्चा खूब हो रही है. दरअसल, डॉ वीके नारायण (डॉ विकास कुमार) रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के सीनियर रेसिडेंट हैं. साथ ही रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं. वहीं झारखंड के एकलौते डॉक्टर हैं जो फेडरेशन ऑफ रेसिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) के चीफ एडवाइजर के पद पर हैं. अपने कार्यों के अतिरिक्त उनकी ट्वीटर पर सक्रियता को लेकर इन दिनों लोगों के उम्मीद की किरण बन गए हैं.

परिवहन मंत्री चंपाई सोरेन को भी @drvknarayan से सहयोग की आशा

31 जुलाई को लोहरद्गा जिले के कुडू तहसील के कोलसिमरी के रहने वाले 41 वर्षीय बनुआ महतो की दोनों किडनी खाराब होने के बाद स्थिति खराब हो गयी. बनुआ गरीब हैं. मजदूरी कर अपने परिवार का भरण- पोषण करते हैं. ऐसे में एक परिचित ने इलाज की उम्मीद लिए ट्वीट किया. ट्वीट में स्वास्थ मंत्री बन्ना गुप्ता और परिवहन मंत्री चंपाई सोरेन को भी टैग किया. ट्वीट के जवाब में चंपाई ने रिम्स के डॉ विकास से सहयोग की अपील की. हालांकि तत्परता के बावजूद बनुआ की मौत हो गयी.

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वहीं धनबाद के सामाजिक कार्यकर्ता अंकित राजगढ़िया ने डॉ विकास से ट्वीट के जरिये एचआईवी से पीड़ित 12 वर्षीय बच्चे की मद्द की अपील की. जिस पर डॉ विकास ने रिम्स में बच्चे को बेड, दवाई और जांच की व्यवस्था के साथ आर्थिक मदद् भी पहुंचाया.

लावारिस मरीज का ना सिर्फ किया इलाज, बल्कि घर भी पहुंचाया

रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में एक लावारिस व्यक्ति को नामकुम पुलिस के द्वारा लाया गया था. उसे रिम्स के आईसीयू में भर्ती किया गया था. डॉ विकास ने न सिर्फ अपने विभाग के वरीय चिकित्सकों के सहयोग उसका इलाज किया, बल्कि ट्वीटर के जरिये उसे उसके घर तक भी पहुंचाया.

कोरोना में टेलीमेडिसिन सेवा से किया इलाज

डॉ विकास के अनुसार, कोराना की दूसरी लहर में 30 डॉक्टरों की टीम बना कर टेलीमेडिसिन सेवा देने का काम किया. झारखंड ही नहीं बल्कि बांगलादेश और कतर के लोगों ने भी संपर्क कर परामर्श लिया. ऐसे में बिना अस्पताल गए कई मरीज कोरोना से ठीक भी हुए.

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डॉ विकास ने अपनी स्कूलिंग और इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पलामू से पूरी करने के बाद मेडिकल की तैयारी के लिए दिल्ली का रूख किया. 2010 में उन्हें राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल गया. 2016 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद रिम्स से 2019 में एमएस-एमसीएच की पढ़ाई पूरी कर यहां के न्यूरो सर्जरी विभाग में बतौर सीनियर रेसिडेंट के पद पर अपना योगदान दे रहे हैं. समाज की सेवा का भाव लिए डिजिटल क्रांति ट्वीटर के जरिए लोगों की हर संभव मद्द पहुंचाने का काम भी कर रहे है.

 

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