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स्वास्थ्य विभाग में हुए तबादलों के जांच के आदेश, पूर्व डीजी हेल्थ समेत 5 बड़े अफसरों की मुश्किलें बढ़ीं

स्वास्थ्य विभाग में हुए तबादलों के जांच के आदेश, पूर्व डीजी हेल्थ समेत 5 बड़े अफसरों की मुश्किलें बढ़ीं

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर हुए तबादलों में मिली गड़बड़ियों को लेकर अब सीएम योगी की कार्रवाई शुरू हो गई है। विभाग के पूर्व डीजी हेल्थ के खिलाफ जांच का आदेश हुआ है। इसके साथ ही तीन संयुक्त निदेशक और एक निदेशक पैरामेडिकल समेत पांच चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ जांच के आदेश हो गए हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग में तबादलों में हुई गड़बड़ियों पर शनिवार को कई ऐक्शन हुए। 14 क्लर्कों को सस्पेंड करके उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, पूर्व डीजी हेल्थ वेद व्रत सिंह के खिलाफ भी जांच के आदेश हुए हैं। उनके जांच के आदेश में बताया गया है कि लेवल 1 के चिकित्साधिकारी फार्मासिस्ट, ईसीजी टेक्नीशियन, प्रयोगशाला प्राविधिज्ञ, अन्य संवर्ग के कार्मिकों एवम प्रयोगशाला सहायक संवर्ग के कार्मिकों के बड़ी संख्या में स्थानांतरण में पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया है। वही पूर्व डीजी हेल्थ पर लगे आरोपों की जांच के लिए सचिव चिकित्सा अनुभाग 7 को जांच अधिकारी बनाया गया है। वो इस मामले की जांच करेंगे। इसी तरह बाकी अधिकारियों के खिलाफ भी उच्च स्तरीय अधिकारियों को जांच सौंपी गई है। इसमें निदेशक पैरामेडिकल निरुपमा दीक्षित से 7 दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनके ऊपर 624 कर्मचारियों के स्थानांतरण में गड़बड़ी का मामला सामने आ रहा है। वहीं, संयुक्त निदेशक कार्मिक डॉ. बीकेएस चौहान, डॉ. सुधीर कुमार यादव और डॉ. राजकुमार के खिलाफ भी जांच के आदेश हुए हैं। अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण बस्ती मंडल को इन तीनों का जांच अधिकारी बनाया गया है। माना जा रहा है कि जैसे-जैसे ये जांच आगे बढ़ेगी वैसे-वैसे कई और अधिकारी भी इसकी जद में आ सकते हैं। वहीं, इस पूरे मामले की जांच रिपोर्ट आने पर कई अधिकारियों पर गाज गिरना लगभग तय माना जा रहा है।

विभाग ने मानी गलती
शनिवार को स्वास्थ्य विभाग में 313 डॉक्टरों में से 48 के ट्रांसफर को निरस्त कर दिया गया है। विशेष सचिव डॉ. मन्नान अख्तर ने इसको लेकर आदेश जारी किया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग ने ट्रांसफर में की गई गलती को स्वीकार किया है। आदेश में साफ-साफ कहा गया है कि ट्रांसफर में गलती से लेवल-1 डॉक्टरों की सूची में लेवल-2 और लेवल-3 (आयुष और दंत शल्य के चिकित्सकों) को शामिल कर लिया गया था। यही कारण है कि 313 डॉक्टरों के ट्रांसफर आर्डर में से इन 48 डॉक्टर्स के आर्डर को निरस्त किया जा रहा है।
रिपोर्ट- अभय सिंह

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