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Amethi: कमाई करने गया था साऊदी, स्मृति ईरानी के प्रयास से 26 दिन बाद आया शव… पाकिस्तानी युवक ने की थी हत्या

Amethi: कमाई करने गया था साऊदी, स्मृति ईरानी के प्रयास से 26 दिन बाद आया शव... पाकिस्तानी युवक ने की थी हत्या

अमेठी: जंग बहादुर कमाई करने विदेश गया था। घर की आर्थिक स्थिति बेहतर हो। समाज में नाम हो। लेकिन, कफन में लिपटा उसका शव जब गांव पहुंचा, तो सारे अरमान खाक में मिल चुके थे। जो परिवार घर के कमाने वाले की आखिरी झलक पाने को अब तक संघर्ष कर रहा था, शव देखते ही फूट पड़ा। भावनाओं का उफान उठा। सबकी आंखें नम थी। 26 दिन पहले सूचना आई थी, शनिवार को शव भी आ गया। सूचना पर भरोसा न हो रहा था। शव को देखकर छाती ही फट गई। मामला, उत्तर प्रदेश के अमेठी का है। साऊदी में नौकरी करने गए युवक की पाकिस्तानी युवक ने 26 दिन पहले हत्या कर दी थी। इसके बाद गुहार, मनुहार और केंद्रीय मंत्री एवं स्थानीय सांसद स्मृति ईरानी के अथक प्रयास के बाद शव को गांव लाया गया।

जंग बहादुर यादव को आखिरकार अपनी मिट्‌टी नसीब हो ही गई। जहां पैदा हुआ। बड़ा हुआ। खेला-कूदा, वहीं अंतिम संस्कार भी हुआ। अमेठी के जगदीशपुर कोतवाली क्षेत्र के वारिसगंज टांगा गांव का रहने वाला जंग बहादुर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए साऊदी चला गया था। वहां वह अब्दुल अजीज अलबशर के यहां ड्राइवर की नौकरी करता था। वहीं, किसी बात पर पाकिस्तान के युवक के साथ झगड़ा हो गया। पाकिस्तानी युवक ने जंग बहादुर की हत्या कर दी। 6 जुलाई की रात करीब 10 बजे उसके पिता राजनारायण को जब यह सूचना मिली तो उनका सब कुछ खत्म हो चुका था। फोन कान में लगाए खबर के गलत होने का इंतजार करते बूढ़े पिता की आंखों से बहते आंसू रुक नहीं रहे थे। फिर शुरू हुई बेटे को आखिरी बार देखने की जंग।

साऊदी से पार्थिव शरीर को लाना बड़ी चुनौती थी। काफी कोशिश की गई, जब सफलता नहीं मिली तो केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी तक मामला पहुंचाया गया। पिता ने मृतक बेटे के शव को मंगाने हेतु प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और अमेठी सांसद और विधायक को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई। साथ ही, हत्या के आरोपी युवक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। केंद्रीय मंत्री के प्रयासों के बाद 26वें दिन ताबूत में लिपटा बेटा का शव जब गांव पहुंचा तो परिजनों में चीख पुकार मच गई। परिवार के लोगों के आंसू नहीं रुक रहे थे। वहीं, घटना को जिस किसी ने सुना, सभी जंग बहादुर के पार्थिव शरीर को देखने पहुंचे।

घटना की जानकारी के बाद पहुंची भीड़ को संभालने में प्रशासन की टीम भी मुस्तैद रही। जंग बहादुर अपने परिवार का भरण-पोषण अपनी नौकरी से कर रहे थे। अब बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। मृतक जंग बहादुर के परिवार में उनकी 42 वर्षीय पत्नी मंजू, 19 वर्षीय पुत्र सौरभ यादव, पुत्री अंजली यादव और आठ साल का सबसे छोटा बेटा गौरव है। मृतक तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। दो भाई प्रमोद यादव व विनोद यादव हैं। सऊदी अरब से मृतक का शव गांव पहुंचने की सूचना पर क्षेत्राधिकारी मुसाफिरखाना अर्पित कपूर, चौकी इंचार्ज वारिसगंज आदि मौजूद रहे। अंतिम दर्शन में हजारों लोग पहुंचे हुए थे। (रिपोर्ट : अरुण गुप्ता)

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