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राम मंदिर का प्लिंथ जून तक होगा तैयार, गर्भगृह में रामलला के दर्शन शुरू कराने की यह है डेडलाइन

राम मंदिर का प्लिंथ जून तक होगा तैयार, गर्भगृह में रामलला के दर्शन शुरू कराने की यह है डेडलाइन

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तहत राम जन्मभूमि निर्माण समिति की सर्किट हाउस में चल रही दो दिवसीय बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए हैं। तय किया गया है कि मंदिर (Ayodhya Ram Mandir) के प्लिंथ का निर्माण कार्य जुलाई माह से पहले पूरा कर लिया जाएगा। समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की अध्यक्षता में चल रही बैठक में ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा, विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र ने निर्माण इकाई के तकनीकी कर्मचारियों से मंदिर निर्माण की प्रगति पर चर्चा की। इसमें अगले चरण के निर्माण का खाका तैयार किया गया है।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य डॉ अनिल मिश्र ने बताया कि मंदिर के प्लिंथ के निर्माण को लेकर इंजीनियरों ने तकनीकी जानकारी हासिल की गई। साथ ही, आंकलन किया गया कि कितने ग्रेनाइट के पत्थर लग चुके हैं, और कितने लगेंगे। उन्होंने बताया कि प्लिंथ का कार्य जून तक पूरा करने का प्रयास है। इसके बाद मुख्य भवन में नक्काशी के पत्थरों को जोड़ने का काम शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि जुलाई से पहले बंशी पहाड़पुर के पिंक पत्थरों का काम शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

डॉ मिश्र ने बताया कि पहले दिन की बैठक में मंदिर की रिटेनिंग वॉल, परकोटा और मुख्य मंदिर के निर्माण में लगने वाले पत्थरों और अन्य निर्माण सामग्री का आंकलन किया गया। इसकी व्यवस्था पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि निर्माण इकाईयों को बारिश के पहले रिटेनिंग वॉल का निर्माण पूरा किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। रिटेनिंग वॉल दक्षिण की तरफ 6 मीटर नीचे तक बन गई है। 6 मीटर और निर्माण होना है। इसी तरह पश्चिमी सिरे में भी रिटेनिंग वॉल का निर्माण करवाया जा रहा है। रिटेनिंग वॉल का लगभग 40 फीसदी काम पूरा हो गया है।

दिसंबर 2023 से शुरू होगा गर्भगृह से रामलला का दर्शन
डॉ अनिल मिश्र ने बताया कि प्लिंथ निर्माण के लिए कर्नाटक व तेलंगाना सेv;ksमंगाए जा रहे ग्रेनाइट पत्थरों की आपूर्ति और रख-रखाव की भी समीक्षा की गई। बैठक में मुख्य मंदिर के गर्भगृह के निर्माण को हर हाल में दिसंबर 2023 तक तैयार कर राम लला के दर्शन शुरू करने को लक्ष्य बनाकर निर्माण कार्य तेजी करने पर जोर दिया गया। इसके लिए बंसी पहाड़पुर की कार्यशाला में तराशे जा रहे पत्थरों की जानकारी हासिल की गई। इससे मंदिर में नक्काशी के पत्थरों से निर्माण में किसी तरह से कभी कोई रुकावट नहीं आ पाए।

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