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Gehu Kharid in UP: वेस्ट यूपी में सरकार को कम गेहूं क्यों दे रहे किसान? क्या आएगी अनाज की दिक्कत, जानिए सबकुछ

Gehu Kharid in UP: वेस्ट यूपी में सरकार को कम गेहूं क्यों दे रहे किसान? क्या आएगी अनाज की दिक्कत, जानिए सबकुछ

मेरठ: वेस्ट यूपी में सरकारी गेहूं खरीद (Gehu Kharid Registration) में किसान कम रुचि दिखा रहे हैं। सरकार का तय लक्ष्य हासिल करना भी मुश्किल माना जा रहा है। किसान एमएसपी से अधिक मूल्य बाजार में मिलने से सरकारी केंद्रों पर गेहूं कम बेच रहा हैं। अब शुक्रवार को विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने और एक्सपोर्ट को अब ‘प्रतिबंधित’ सामानों की कैटेगरी में डालने के बाद से किसान चौकन्ना हो गया हैं। रूस यूक्रेन युद्ध के बाद आने वाले समय में गेहूं की कमी का आशंका देख रहे काफी किसान स्टाक करने की तरफ भी कदम बढ़ा रहा हैं।

दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते वैश्विक बाजारों में गेहूं के दाम बढ़े हैं। रूस और यूक्रेन गेहूं के बड़े उत्पादक देश हैं। युद्ध की वजह से इन देशों से आपूर्ति बाधित हुई है। गेहूं की इंटरनेशनल मार्केट में कीमत करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। वहीं घरेलू बाजार में भी गेहूं और आटा भी महंगा हुआ है। जिससे सरकार का लक्ष्य पूरा होना मुश्किल हो रहा हैं। माना जा रहा है कि अगर ऐसा ही रहा तब आने वाले वक्त में अनाज की दिक्कत सामने आ सकती है।

किसान का कहना है कि ऐसे में गेहूं बिक्री सोच विचार कर करेंगे। किसान शक्ति संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी पुष्पेंद्र सिंह के मुताबिक सरकार के खुदरा महंगाई के आंकड़ों को देखें तो अप्रैल में गेहूं और आटा कैटेगरी की महंगाई दर 9.59% रही है। मार्च की 7.77% की दर से अधिक थी। जबकि गेहूं की सरकारी खरीद में करीब 55% की गिरावट दर्ज की गई है, क्योंकि गेहूं का बाजार मूल्य इस समय सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ज्यादा है। सरकार ने गेहूं का एमएसपी 2,015 रुपये प्रति क्विंटल है।

थाानाभवन में सरकारी गेहूं क्रय केंद्र के बाहर लगा सरकारी मूल्य का बैनर

वेस्ट यूपी में सरकार ने एक अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति कुंतल पर गेहूं खरीद के लिए केंद्र खोल रखे हैं, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी खरीद रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। वेस्ट यूपी के किसानों का कहना है कि पिछले साल तक 43 कुंतल पर हेक्टेयर की उत्पादकता वेस्ट यूपी में थी। इस बार यह 49 कुंटल से भी कम हैं। इसी के साथ इस बार गेहूं की गुणवत्ता खराब हैं।

गर्मी जल्दी पड़ने अप्रैल सरीखा तापमान मार्च में होने से गेहूं की मोटाई कम रह गई। परिपक्क नहीं हो सका। गेहूं पर चमक नहीं हैं। वेस्ट यूपी में ज्यादातर बुलाई जनवरी फरवरी तक होती हैं। गेहूं देर से पकता और कटता हैं। जबकि पंजाब और हरियाणा में नवंबर दिसंबर में बुवाई होकर जल्द कट जाता हैं।

मेरठ के जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी सत्येंद्र कुमार सिंह के मुताबिक मेरठ में शासन के क्रय केंद्र 43 हैं। 40 संचालित हैं। एक अप्रैल से 13 मई तक मेरठ में 46 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य हैं। कुल 390 किसानों ने अभी तक 1323 मीट्रिक टन गेहूं खरीद किया गया हैं। कोशिश की जा रही है लक्ष्य पूरा हो जाए। आवक कम हैं। गेहूं की पैदावार भी इस बार में हुई हैं।

आगरा में सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों पर सन्नाटा, मंडियों का कर रहे रुख
आगरा जिले में गेहूं की सरकारी खरीद बहुत धीमी है। एक अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति कुंतल पर गेहूं खरीद के लिए केंद्र खोले गए हैं, लेकिन डेढ़ महीने बाद भी खरीद रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। कारण बताया जा रहा है कि गेहूं की एमएसपी से अधिक रेट व्यापारी बाजार में दे रहे हैं।सहायक आयुक्त सहकारिता ने क्रय केंद्रों पर लक्ष्य के अनुरूप गेहूं ना खरीदे जाने पर नाराजगी व्यक्त की है और सरकारी गेहूं क्रय केंद्र प्रभारियों को हर रोज सौ कुंतल गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है।

शासन के निर्देशानुसार गेहूँ खरीद एक अप्रैल 2022 से शुरू है। सरकार का कहना है कि पिछले वर्ष की गेहूं खरीद के सापेक्ष इस वर्ष अधिक से अधिक गेहूं की खरीद की जाए, लेकिन अभी तक गेहूं खरीद के मानक दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहे हैं। सरकार द्वारा इस वर्ष गेहूं खरीद केंद्रों पर, गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है। लेकिन, बावजूद इसके किसान प्राइवेट मंडियों की तरफ रुख कर रहे हैं।

गार में विपणन विभाग के 42 सरकारी गेहूं क्रय केंद्र खुले हैं। अभी कुल 203 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो पाई है। लक्ष्य 45 हजार मीट्रिक टन है। आंकड़ों के हिसाब से लक्ष्य के सापेक्ष .44 प्रतिशत की ही खरीद अब तक हो पाई है।सहायक आयुक्त सहकारिता ने क्रय केंद्रों पर लक्ष्य के अनुरूप गेहूं ना खरीदे जाने पर नाराजगी व्यक्त की है।

शामली के थाानाभवन में खाली पड़े सरकारी गेहूं क्रय केंद्र

शामली के गेहूं का बाजार मूल्य सरकारी केंद्रों से ज्यादा
शामली के थाना भवन गेहूं क्रय केंद्र के प्रभारी अमित यादव ने बताया कि पिछले साल प्रतिदिन लगभग 300 कुंतल गेहूं खरीदा जाता था। इस बार सरकारी रेट से 2015 रुपए घोषित है लेकिन बाजार में व्यापारियों द्वारा सरकारी रेट से 200 से 300 रुपये अधिक मूल्य दिया जा रहा है। व्यापारी किसान के पास जाकर गेहूं खरीद रहा है जिस कारण सरकारी केंद्रों पर कम खरीदारी हो रही है। एक अप्रैल से 14 मई तक सिर्फ 594 कुंतल 50 किलो गेहूं की थानाभवन में खरीदारी हो सकी है।

फिरोजाबाद में कैसे मिले गेहूं अफसर टेंशन में
फिरोजाबाद में गेहूं खरीद के लिए 63 केंद्र बनाए गए हैं। ज्यादातर पर सन्नाटा पसरा हुआ है। अभी तक जिले में कुल 14 कुंतल गेहूं की खरीद की जा सकती है।जबकि लक्ष्य 6700 मेट्रिक टन खरीद का है। खरीद 30 जून तक जारी रहने की उम्मीद है। गेहूं की कम आवक के बारे अफसरों का कहना है कि कहना है खुले बाजार में गेहूं की कीमत अधिक है। इस बार की गेहूं की पैदावार भी कम हुई हैं।

सहारनपुर में गेहूं का उत्पादन कम, सरकार को किसानों का इंतजार
सहारनपुर जिले मे गेहूं का हर साल अच्छा उत्पादन होता आया है लेकिन इस बार उत्पादन में 20 प्रतिशत की कमी आंकी गई।ए जिला कृषि अधिकारी धीरज सिंह ने बताया कि इस बार जिले मे गेहूं खरीदारी का लक्ष्य 116000मेट्रिक टन है जबकि अभी तक 5553मीट्रिक टन की खरीद हुई है । बताया कि एक अप्रैल से ही गेहूं की आवक काफी कम है ।

अलीगढ़ में सरकारी गेहूं क्रय केंद्रों को किसानों को इंतेजार
अलीगढ़ में 1 अप्रैल से 109 केंद्रों पर ज‌िले में गेहूं खरीद के लक्ष्य 1,69,000 मीट्रिक टन के सापेक्ष 56 क्रय केंद्रों पर कुल 713 किसानों से 3,016.76 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है। 30 मई तक केंद्रों पर गेहूं खरीद की जाएगी । सरकारी खरीद का रेट इस बार 2015 रुपये प्रति कुंतल है जबकि बाजार में 2200 रुपये मिल रहे हैं। ऐसे में किसानों का रूख सरकारी क्रय केंद्रों की बजाए बाजार या अनाज मंडियों की ओर अधिक है।

इसके अलावा खुद आढ़ती व गल्ला कारोबारी किसानों से संपर्क कर घरों से नकद धनराशि देकर गेहूं की खरीद कर रहे हैं।जिला खाद्य विपणन अधिकारी राजीव कुलश्रेष्ठ ने बताया कि गेहूं खरीद के म‌िले लक्ष्य को पूरा करने के लिए अब मोबाइल क्रय बनाए जा रहे हैं। इसके लिए क्रय केंद्र प्रभारी ग्रामीण क्षेत्र के उचित दर विक्रेताओं, ग्राम प्रधानों आद‌ि से बातचीत कर गेहूं खरीद में सहयोग लेंगे।

बागपत में भी किसान बना रहे सरकारी केंद्रों से दूरी
बागपत जिले में इस वर्ष सरकारी केंद्रों पर गेहूं की आवक कम रही। इस साल एमएसपी 40 रुपये अधिक होने के बाद भी अधिकांश गेहूं क्रय केंद्र सुने पड़े हैं। बाजार में गेहूं बिकता दिख रहा हैं।

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