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औद्योगिक विकास मंत्री नन्दी ने बीपीसीएल नैनी को बचाने के लिए की पहल

भारत पम्प्स एवं कम्प्रेशर्स लिमिटेड नैनी प्रयागराज (बी.पी.सी.एल.) को बचाने और नैनी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग को बचाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री एवं प्रयागराज शहर दक्षिणी विधायक नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री महेंद्रनाथ पांडेय को पत्र लिख कर बीपीसीएल को निजी कंपनियों को सौंप कर संचालित किए जाने की मांग की है, जिसके लिए उन्होंने भारत सरकार के स्तर पर एक बैठक आयोजित करने तथा बैठक में औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन तथा इच्छुुक निवेशकों को भी आमंत्रित किए जाने की मांग की है।
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री को लिखे गए पत्र में औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री को लिखे गए पत्र में कहा है कि बीपीसीएल कम्पनी के कार्मिकों के देयकों का भुगतान करते हुए वीआरएस, वीएसएस दिए जाने तथा कम्पनी प्लांट के संचालन व कम्पनी को बंद किए जाने का निर्णय लिया गया है। 295 एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निःशुल्क उपलब्ध करायी गई है, किन्तु कम्पनी के नाम लीज डीड सम्पादित नहीं की गई है। बिल्डिंग एवं प्लांट के स्थायी निर्माण के साथ, प्रश्नगत भूमि उत्तर प्रदेश सरकार को वापस किए जाने के निर्णय के साथ बीपीसीएल से यह अपेक्षा की गई है कि वह उक्त कम्पनी के प्लांट, मशीनरी व चल सम्पत्ति को डीपीई, सरकार की गाइड लाइंस के अनुसार एमएसटीसी लिमिटेड के माध्यम से ई-ओक्सन के द्वारा निस्तारित करते हुए प्राप्त धनराशि से भारत सरकार के ऋण की यथा सम्भव अदायगी करें। जबकि बीपीसीएल कम्पनी की चल-अचल सम्पत्ति एवं टेक्नोलॉजी को एक साथ खरीदने में तीन प्राइवेट कम्पनियों द्वारा रूचि दिखाई गई है। पत्र में यह भी लिखा है कि मात्र प्लांट, मशीनरी एवं चल सम्पत्ति को नीलाम करने से न तो उसका उचित मूल्य प्राप्त हो सकेगा और न ही यूनिट स्थायी रूप से बंद हो जाने से रोजगार के अवसर सृजित हो पाएंगे।
चूंकि कुछ निजी निवेशक बीपीसीएल नैनी को संचालित करने में इच्छुक हैं, अतः यदि इसे चल-अचल सम्पत्ति सहित निजी निवेशकों के माध्यम से संचालित कराया जाएं तो न केवल भारत सरकार को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा, अपितु इस इकाई के पुनः संचालित होने से रोजगार सृजन भी होगा। इसलिए भारत सरकार के स्तर पर एक बैठक आयोजित कर बैठक में औद्योगिक विकास विभाग, उत्तर प्रदेश शासन तथा इच्छुुक निवेशकों को भी आमंत्रित किया जाए, ताकि बीपीसीएल को पुनः विकसित किया जा सके।

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