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अपनों की बाट जोह रहे ‘पुरखे’: आगरा के ताजगंज शमशान घाट पर तीन साल से रखे हैं दो हजार अस्थि कलश

अपनों की बाट जोह रहे 'पुरखे': आगरा के ताजगंज शमशान घाट पर तीन साल से रखे हैं दो हजार अस्थि कलश

सार
कोरोना की दूसरी लहर में जीवन खो चुके मृतकों के पचास अस्थि कलश भी एक साल से घाट पर रखे हैं, लेकिन अब तक कोई भी परिजन इन्हें लेने नहीं आया।  

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आगरा के ताजगंज श्मशान घाट पर ‘पुरखे’ अपनों की बाट जोह रहे हैं। करीब तीन साल से दो हजार अस्थि कलश यहां रखे हुए हैं। इनका विसर्जन किया जाना है। विद्युत शवदाह गृह और घाट पर शवों का अंतिम संस्कार करने के बाद जो परिजन गए तो फिर लौट कर नहीं आए हैं। श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी के पदाधिकारियों ने उनके परिजनों से कई बार संपर्क भी किया।

कमेटी के महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि कुछ परिजन समय नहीं होने की बात कह देते हैं, तो कुछ आर्थिक तंगी के कारण कलश लेने नहीं आ पाते हैं। कमेटी की ओर से इनसे समय-समय पर संपर्क किया जाता है। हालांकि एक साल हो जाने पर कम ही लोग आते हैं अस्थित कलश का विसर्जन करने के लिए। उन्होंने बताया कि तीन साल में एक बार सामूहिक रूप से विसर्जन होता है। इसके बाद ही रैक खाली हो सकेंगी। 

भादों में होगा सामूहिक विसर्जन 

कोरोना की दूसरी लहर में जीवन खो चुके मृतकों के पचास अस्थि कलश भी एक साल से घाट पर रखे हैं। ताजगंज विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि कई बार संपर्क करने के बाद भी कोई परिजन कलश लेने नहीं आया है। इस साल भादों में इनका भी सामूहिक विसर्जन कर दिया जाएगा। सामूहिक विसर्जन कार्यक्रम की तिथि श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी की बैठक के बाद घोषित की जाएगी।

जमीन पर रखने पड़ रहे कलश 

ताजगंज शमशान घाट के प्रभारी मनोज शर्मा ने बताया कि अस्थि कलश के संबंध में संपर्क करने पर कई बार परिजन वादा कर देते हैं लेकिन आ नहीं पाते। कई बार संपर्क करने पर भी कोई नहीं आता तो धीरे-धीरे फोन करना कम कर देते हैं। अस्थि कलशों से घाट की सभी रैक पूरी तरह से भर चुकी हैं। कई परिजनों ने कलशों को ले जाने का वादा भी किया, लेकिन कभी लेने नहीं आए। अब एक रैक भी नए कलश के लिए खाली नहीं है। इस कारण जो नए अस्थि कलश हैं, उन्हें जमीन साफ कर रखा जा रहा है। 

विस्तार

आगरा के ताजगंज श्मशान घाट पर ‘पुरखे’ अपनों की बाट जोह रहे हैं। करीब तीन साल से दो हजार अस्थि कलश यहां रखे हुए हैं। इनका विसर्जन किया जाना है। विद्युत शवदाह गृह और घाट पर शवों का अंतिम संस्कार करने के बाद जो परिजन गए तो फिर लौट कर नहीं आए हैं। श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी के पदाधिकारियों ने उनके परिजनों से कई बार संपर्क भी किया।

कमेटी के महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि कुछ परिजन समय नहीं होने की बात कह देते हैं, तो कुछ आर्थिक तंगी के कारण कलश लेने नहीं आ पाते हैं। कमेटी की ओर से इनसे समय-समय पर संपर्क किया जाता है। हालांकि एक साल हो जाने पर कम ही लोग आते हैं अस्थित कलश का विसर्जन करने के लिए। उन्होंने बताया कि तीन साल में एक बार सामूहिक रूप से विसर्जन होता है। इसके बाद ही रैक खाली हो सकेंगी। 

भादों में होगा सामूहिक विसर्जन 

कोरोना की दूसरी लहर में जीवन खो चुके मृतकों के पचास अस्थि कलश भी एक साल से घाट पर रखे हैं। ताजगंज विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि कई बार संपर्क करने के बाद भी कोई परिजन कलश लेने नहीं आया है। इस साल भादों में इनका भी सामूहिक विसर्जन कर दिया जाएगा। सामूहिक विसर्जन कार्यक्रम की तिथि श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी की बैठक के बाद घोषित की जाएगी।

जमीन पर रखने पड़ रहे कलश 

ताजगंज शमशान घाट के प्रभारी मनोज शर्मा ने बताया कि अस्थि कलश के संबंध में संपर्क करने पर कई बार परिजन वादा कर देते हैं लेकिन आ नहीं पाते। कई बार संपर्क करने पर भी कोई नहीं आता तो धीरे-धीरे फोन करना कम कर देते हैं। अस्थि कलशों से घाट की सभी रैक पूरी तरह से भर चुकी हैं। कई परिजनों ने कलशों को ले जाने का वादा भी किया, लेकिन कभी लेने नहीं आए। अब एक रैक भी नए कलश के लिए खाली नहीं है। इस कारण जो नए अस्थि कलश हैं, उन्हें जमीन साफ कर रखा जा रहा है। 

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