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Editorial:पाकिस्तान के इशारे पर चल रहा खालिस्तानी प्रोपोगेंडा, भारत विरोधी प्रचार करने वालों पर लगे लगाम

14-1-2022

 पाकिस्तान सरकार के मुखपत्र रेडियो पाकिस्तान ने   को एक और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा शुरू किया और प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकवादी संगठन ‘सिख फ ॉर जस्टिस  का पक्ष लिया। रेडियो पाकिस्तान ने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में दावा किया कि भारत सिख फ ॉर जस्टिस को ‘बदनामÓ करने के लिए प्रोपेगेंडा चला रहा है।

हाल ही में भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई खुफिया जानकारी के आधार पर जर्मन अधिकारियों ने सिख फ ॉर जस्टिस के आतंकवादी जसविंदर सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार किया था। वह लुधियाना कोर्ट विस्फ ोट में शामिल था। रेडियो पाकिस्तान ने यह कहकर एसएफ जे का बचाव करने की कोशिश की कि उसने आतंकी हमले से खुद को दूर कर लिया है। पाकिस्तान ने आगे दावा किया कि अमेरिकी प्रशासन ने खालिस्तान आंदोलन को आतंकवादी के रूप में लेबल करने के भारत के नैरेटिव को अस्वीकार कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि सिख फॉर जस्टिस ने खालिस्तान आंदोलन को आधिकारिक रूप से समर्थन देने के लिए कई मौकों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। हाल ही में स्वर्ण मंदिर लिंचिंग मामले से ठीक दो दिन पहले एसजेएफके गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्र लिखकर एसएफजे को ‘मुक्त पंजाबÓ और ‘खालिस्तानÓ बनाने के लिए समर्थन करने के लिए लिखा था।

16 दिसंबर को खान को लिखे पत्र में आतंकवादी संगठन एसजेएफ खुद को ‘मानवाधिकार वकालत समूहÓ कहा था। जनमत संग्रह का समर्थन माँगते हुए पत्र में उसने लिखा है, “एसजेएफ इस सवाल पर अपना पहला वैश्विक गैर-सरकारी खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित कर रहा है कि ‘क्या भारतशासित पंजाब को एक स्वतंत्र देश होना चाहिएÓ?”

गौरतलब है कि एसजेएफका संस्थापक और आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू सालों से भड़काऊ भाषण देता आ रहा है। वह 26 जनवरी की उस घटना से सीधे तौर पर जुड़ा था, जिसमें उसने सिख युवाओं से लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए उकसाया था। 26 जनवरी को पवित्र सिख चिन्ह के साथ लाल किले पर दो झंडे फहराए गए थे। हाल ही में एसएफजे ने फिरोजपुर में पीएम मोदी के काफिले की नाकेबंदी की जिम्मेदारी ली थी। सुप्रीम कोर्ट के कई अधिवक्ताओं ने हाल ही में रिपोर्ट किया था कि उन्हें यूके से एसएफजे के कार्यकर्ताओं से धमकी भरे फोन आए थे, जिसमें उन्होंने शीर्ष अदालत को मामले को न ले जाने की चेतावनी दी थी।

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