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प्रदेश में संचालित बेटी बचाओ, कार्यक्रम की जागरूकता के परिणाम स्वरूप बालिकाओं के लिंगानुपात में हुई बढ़ोत्तरी

बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओ योजना भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत प्रायोजित योजना है। इस योजना का संचालन प्रदेश में प्रत्येक स्तर पर जिलाधिकारी एवं जिला प्रोबेशन अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित बैंक खाते के माध्यम से किया जाता है। योजना का उद्देश्य गिरते हुए लिंगानुपात में सुधार करना, बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहन देना तथा बालिका के प्रति आमजन में सकारात्मक सोच विकसित करना है। योजना के अन्तर्गत विभिन्न माध्यमों यथा-नाटक/नुक्कड, बैनर, पोस्ट वॉल राइटिंग, जनसभा, रेडियों जिंगल, विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं आदि समारोहों का आयोजन कर जनमानस में जन जागरूकता फैलाई जा रही है।
यह योजना प्रदेश के समस्त जनपदों में संचालित हैै। इस योजना के अन्तर्गत आच्छादित जनपदों द्वारा उपलब्ध धनराशि के सापेक्ष क्रियान्वयन करते हुए व्यय किये गये है। वित्तीय वर्ष 2018-19 से योजना के लिए धनराशि भारत सरकार ़द्वारा सीधे जिलाधिकारी को स्वीकृत की जाती है। जिलाधिकारी द्वारा उपयोग प्रमाण पत्र भारत सरकार को सीधे प्रेषित किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में योजना में रू0 1798.00 लाख के सापेक्ष रू0 970.00 लाख का व्यय किया गया तथा वित्तीय वर्ष 2020-21 में रू0 1396.00 लाख के सापेक्ष रू0 1011.00 लाख का व्यय किया गया। जनसामान्य की मानसिकता में सकारात्मक परिवर्तन लाने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2019-20 में 96.95 लाख महिलाओं/बालिकाओं से सम्पर्क कर उन्हें जागरूक किया गया तथा वर्ष 2020-21 में कुल 1.96 लाख गतिविधियों के माध्यम से 73.60 लाख महिलाओं तथा बालिकाओं को जागरूक किया गया है। चालू वर्ष में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लाखों महिलाओं तथा बालिकाओं को जागरूक किया जा रहा है।
प्रदेश मंे संचालित बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश सरकार ने महिला सशक्तीकरण पर विशेष बल दिया जिसके परिणाम अब दिखने लगे है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व स्वाबलम्बन के लिए चलाये गये ’’मिशन शक्ति’’ के अन्तर्गत करोड़ो बालिकाओं, महिलाओं सहित अन्य लोगों तक पहुॅच बनाते हुए जन जागृति लाई गई। प्रदेश सरकार की परिवार नियोजन जन जागरूकता कार्यक्रमों, भ्रूण हत्या पर रोक, महिलाओं पुरूषों व आमजन की सोच में सकारात्मक दृष्टिकोण लाने का ही परिणाम है कि प्रदेश में लिंगानुपात जो वर्ष 2015-16 में 1000 बालकांे पर 995 बालिकायें थी, वहीं वर्तमान सरकार के विशेष प्रयासों से लिंगानुपात 1000 बालकों पर 1017 बालिकायें हो गई हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आये हैं कि सरकार द्वारा गम्भीरता से लागू की गई स्वास्थ्य सेवाओं के कारण प्रजनन दर में भी गिरावट आई है। आज प्रदेश में बेटियों को हर क्षेत्र में सुविधाये दी जा रही है। बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच के कारण ही वे हर तरह की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और आगे बढ़ रही हैं।  

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