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राज्यपाल जैसे पद पर रहते हुए यह क्या बोल गए सत्यपाल मलिक?

मूल रूप से समाजवादी विचारों वाले एवं समाजवादी पार्टी के टिकट पर अलीगढ़ से वर्ष 1996 में चुनाव लड़ने वाले सत्यपाल मलिक वर्ष 2004 में भारतीय जनता पार्टी में सम्मिलित हुए थे। हालांकि वह वर्ष 1984 में कांग्रेस में शामिल हुए थे और तीन वर्ष तक पार्टी की ओर से राज्यसभा सांसद रहे और फिर 1988 में जनता दल में शामिल हुए। उसके बाद वर्ष 2004 में भाजपा में सम्मिलित हुए।

इसका अर्थ यह है कि सत्यपाल मलिक हर दल की यात्रा के बाद भाजपा में आए और भाजपा में आने के बाद यहीं के हो गए, एवं अब तो वह मेघालय के राज्यपाल हैं।

हाल ही में सत्यपाल मलिक बहुत चर्चा में हैं। यहाँ तक कि आज तो उन्हें पदमुक्त करने का आह्वान करने वाला एक हैशटैग भी चल रहा है। #SackSatyapalMalik। और आम लोग बहुत गुस्सा व्यक्त कर रहे हैं। पर ऐसा हो क्यों रहा है? सत्यपाल मलिक तो ऐसे पद पर हैं, जिसे लोग केवल केंद्र सरकार का ही प्रतिनिधि मानते हैं।

दरअसल उन्होंने एक वीडियो में धमकी जैसे स्वर में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाक़ात के साथ उल्लेख का दावा करते हुए कहा है कि “उनसे मिलने गया तो मैंने उन्हें कहा कि आप गलतफहमी में हैं। न तो इन सिक्खों को हराया जा सकता है, इनके गुरु के चारों बच्चे उनकी मौजूदगी में खत्म हुए थे, लेकिन उन्होंने सरेंडर नहीं किया। इन जाटों को भी नहीं भगाया जा सकता है। आप यह सोचते हों कि ये ऐसे ही चले जाएंगे, इन्हें कुछ ले-देकर भेज दो। मैंने उनसे कहा कि दो काम तो बिल्कुल भी मत करना, एक तो इनपर बल प्रयोग मत करना और दूसरा इन्हें खाली हाथ मत भेजना, क्योंकि यह भूलते भी नहीं हैं। 300 साल तक नहीं भूला। मिसेज गांधी ने जब अकाल तख्त तोड़ा था तो उन्होंने अपने फार्म हाउस पर महामृत्युंजय का यज्ञ करवाया था। और जब मैंने उनसे पूछा कि आप तो यह सब मानती नहीं हैं तो उन्होंने कहा कि तुम जानते नहीं हो, यह लोग तीन सौ साल तक नहीं भूलते हैं। मैं श्योर हूँ कि यह लोग मुझे मारेंगे। मने, इंदिरा गांधी जी को यह अंदाजा था कि यह लोग उन्हें मारेंगे। और उन्होंने मारा। जनरल वैद्या को उन्होंने पुणे में जाकर मारा, और जनरल डायर को लंदन जाकर मारा। इसलिए इनके पेशेंस का इम्तिहान न लें, और परसों मीटिंग में दो जनरल भी थे, जिन्होनें यह कहा कि इस किसान आन्दोलन से सेना पर भी प्रभाव पड़ रहा है!”

सत्यपाल मलिक हालांकि कई दिनों से ऐसे ही बयान दे रहे हैं। पर वह ऐसा क्यों कर रहे हैं? इस विषय में जो अनुमान लगाए जा रहे हैं वह यही हैं कि अब शायद राज्यपाल के रूप में यह इनकी अंतिम पारी है और अब आगे उन्हें कुछ मिलना नहीं है, इसलिए वह “राजनीतिक शहादत” देने के लिए ऐसे उल जलूल बयान दे रहे हैं, जिससे सरकार उन्हें हटा दे और वह राजनीतिक शहादत का फायदा उठा सकें। वैसे राजनीतिक गलियारों में समाजवादी और भाजपाई सत्यपाल मलिक के विषय में कई चर्चाएँ होती रहती हैं, कि कैसे वह आपातकाल में जेल जाने से बचे थे।

इस विषय में वरिष्ठ पत्रकार एवं आपका अख़बार के सम्पादक प्रदीप सिंह का यह वीडियो काफी परतें खोलता है। वह बताते हैं कि सत्यपाल मलिक अपनी सेटिंग से आपातकाल में जेल जाने से बच ही नहीं गए थे बल्कि साथ ही उन्होंने अपने साथियों को भी गिरफ्तार करा दिया था।

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