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नौटंकी को रंगमंच से जोड़ने वाले डॉ. उर्मिल कुमार थपलियाल का निधन,

Urmil Kumar Thapliyal: नौटंकी को रंगमंच से जोड़ने वाले डॉ. उर्मिल कुमार थपलियाल का निधन, अधूरी रह गई मराठी 'कथा'

वरिष्ठ नाटककार, व्यंग्यकार और कई सम्मान से अलंकृत डॉ. उर्मिल कुमार थपलियाल का निधन लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे, लखनऊ के इंदिरा नगर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस लीउर्मिल कुमार थपलियाल के निधन से पूरा रंगमंच जगत शोक में डूबा, निधन की खबर हर
वरिष्ठ नाटककार, व्यंग्यकार, संगीत नाट्य अकादमी और यश भारती सम्मान से अलंकृत डॉ.उर्मिल कुमार थपलियाल (80) का मंगलवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे।

फिल्म अभिनेता और वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी ने बताया कि डॉ. थमलियाल आकाशवाणी में न्यूज रीडर थे। साल 1972 में दर्पण के संस्थापक बने। उन्होंने लगभग 95 नाटक किए। वह शहर से प्रकाशित होने वाले अधिकांश लोकप्रिय समाचारपत्रों में लिखते थे। ‘हे ब्रेख्त’ उनका आखिरी नाटक 19 जनवरी 2000 को मंचित हुआ था। उन्होंने आकाशवाणी में भी मंच की तर्ज पर नाटक रिकॉर्ड करवाने की परंपरा डॉ. अनिल रस्तोगी के अनुसार, ‘डॉ. थपलियाल मराठी तीन पात्रीय नाटक ‘कथा’ का मंचन करना चाहते थे। मराठी समाज की ओर से इसका मंचन शहर में विक्रम गोखले ने किया था।’ वरिष्ठ रंगकर्मी राकेश ने बताया कि साल 1970 में डॉ. उर्मिल थपलियाल से पहली मुलाकात आकाशवाणी में हुई थी।

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