मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अफसरों से प्रस्तावित सीएम हाउस का प्लान मांगा और उन्हें जैसे ही बताया गया कि यह बंगला 16 एकड़ में बनने वाला है, तो वे अफसरों पर जमकर भड़के। उन्होंने दो-टूक कह दिया कि राजतंत्र नहीं चल रहा है, यहां लोकतंत्र है। मौजूदा सीएम हाउस 6 एकड़ में है। अभी उसमें पूरी तरह घूम नहीं पाते तो 16 एकड़ में क्या करेंगे? एक व्यक्ति के लिए इतना बड़ा बंगला बनाने का क्या तुक है? धरातल पर रहिए और ऐसी योजनाएं बनाइये जो उचित हों। तब सीएम बघेल के साथ गए मंत्रियों में से एक ने सुझाव दिया कि नया बंगला 16 के बजाय 4 एकड़ में बन सकता है, तब मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि जितना बड़ा सीएम हाउस अभी है, उतना ही यानी 6 एकड़ में यहां भी बना सकते हैं। तब जाकर भूपेश शांत हुए और बंगले के इस साइज पर सहमति दे दी।

सीएम बघेल चार वरिष्ठ मंत्रियों के साथ शाम को नवा रायपुर पहुंचे और करीब घंटेभर रहे। इस दौरान अफसरों ने उन्हें भाजपा सरकार के दौरान मंजूर किया गया प्लान दिखाया। एनआरडीए के अफसरों ने जैसे ही सीएम हाउस का प्लान दिखाया और बताया कि पिछली सरकार ने 16 एकड़ में सीएम हाउस बनाने की मंजूरी दी थी, तब भूपेश भड़के। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अचानक उन्होंने काफी सख्त तेवर अपना लिया और अफसरों से पूछा कि 16 एकड़ में किसी एक व्यक्ति के लिए बंगला बनाने का अर्थ क्या है? यहां राजतंत्र नहीं चल रहा है, लोकतंत्र है। मुख्यमंत्री और मंत्री ही नहीं, सभी सरकारी बंगलों को उतनी जगह पर ही बनाया जाए, जितना जरूरी हो। इस दौरान इस पर साथ खड़े कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कह दिया कि पिछले सीएम तो हमेशा ही बंगले में रहने के लिए बने थे, इसलिए 16 एकड़ का बंगला बनवा रहे थे? काम करने वालों को इतना बड़ा बंगला नहींं चाहिए। तो आवास मंत्री अकबर ने कहा कि नया बंगला भी 6 एकड़ में ही बनना सही रहेगा।

भाजपा सरकार सेक्टर-18 में बना रही थी सिविल लाइंस, अब सेक्टर-24 में

भाजपा सरकार के कार्यकाल में नवा रायपुर के सेक्टर-18 में सिविल लाइंस बनाने के मंजूर प्रस्ताव को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गिरा दिया है और इसे सेक्टर-24 में बनाने की घोषणा कर दी है। यही नहीं, मुख्यमंत्री ने सेरीखेड़ी में प्रस्तावित विधायक परिसर को भी बदल दिया है। इसी के पास अफसरों के बंगले भी प्रस्तावित थे। ये दोनों प्रोजेक्ट भी नवा रायपुर के सेक्टर-24 में ही जाएंगे और सबको मिलाकर सिविल लाइंस का नाम दिया जाएगा। यह सेक्टर नाबार्ड कार्यालय के करीब है। लगभग 200 एकड़ के नए सिविल लाइंस में राजभवन, मुख्यमंत्री-मंत्री बंगले, विधायकों और अफसरों के बंगले भी बनाए जाएंगे। सीएम भूपेश ने मंगलवार को नवा रायपुर में आवास एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे और राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के अलावा मुख्य सचिव सुनील कुजूर के साथ स्थल निरीक्षण किया और मौके पर ही पूरा प्लान बदल दिया। सीएम बघेल ने कहा कि जहां सीएम-मंत्रियों के बंगले बन रहे हैं, सुरक्षा के लिहाज से विधायकों के मकान भी वहीं होने चाहिए। यही नहीं, उन्होंने अफसरों को निर्देश दिए कि सेक्टर -24 में माल और गार्डन का प्लान भी बनाया जाए।

दो साल में बनाने के निर्देश : सीएम ने बताया कि सिविल लाइंस के लिए सरकार ने 535 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए हैं। टेंडर प्रक्रिया भी अंतिम दौर में है। वर्क आर्डर से दो साल के भीतर निर्माण पूरे हो जाने चाहिए। क्योंकि मंत्री-अफसर रहने लगेंगे, तभी नए शहर में बसाहट बढ़ेगी।

जहां तक विधायक आवास का सवाल है, सीएम ने कहा कि स्पीकर डा. चरणदास महंत से इस बारे में बात होगी। गौरतलब है, 3-4 मंजिल वाले विधायक आवास के लिए 140 करोड़ रुपए मंजूर किए जा चुके हैं। इससे पहले, अावास मंत्री अकबर और पीडब्ल्यूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू समेत 4 मंत्रियों ने पिछले हफ्ते नवा रायपुर में सिविल लाइंस बनाने के लिए 4 जगह का निरीक्षण किया था। उनमें सेक्टर-24 भी था।

विधायकों के अावास पर भी भूपेश ने दिखाए कड़े तेवर

इसके बाद बघेल ने विधायकों के अावासीय परिसर के बारे में पूछा तो अफसरों ने बताया कि यह सेरीखेड़ी में मंजूर हुअा है, जो सेक्टर-24 से ढाई किमी दूर है। उस पर 140 करोड़ खर्च होने हैं। तब सीएम ने कहा कि विधायक निवास सेरीखेड़ी के बजाय सेक्टर-24 में ही बनाएं, क्योंकि विधायकों को मंत्रियों से काम रहता है और वे करीब रहेंगे तो ज्यादा अासानी होगी। जब अफसरों ने स्थान बदलने में लागत बढ़ने का अंदेशा जताया तो सीएम फिर नाराज हुए और कहा कि पिछली सरकार ने नया रायपुर में 6 हजार करोड़ खर्च कर दिए और यहां लोगों को बसाया नहीं जा सका। 5-6 करोड़ रुपए ऊपर खर्च हो जाएंगे और और सारी सुविधाएं एक जगह हो जाएंगी, तो इससे अच्छा और क्या होगा। सीएम ने जल्द नया प्लान बनाकर अगले एक साल में निर्माण पूरा कर लेने का टारगेट भी तय कर दिया।

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