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Gyanvapi Masjid case: 1664 में औरंगजेब के काल से विवाद! 1991 में मुकदमा, 357 साल पुराने ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ विवाद की अहम तारीखें

Gyanvapi Masjid case: 1664 में औरंगजेब के काल से विवाद! 1991 में मुकदमा, 357 साल पुराने ज्ञानवापी-काशी विश्वनाथ विवाद की अहम तारीखें

हाइलाइट्स:वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर बड़ा फैसलाकोर्ट ने कहा पुरातत्व विभाग की छह लोगों की टीम करेगी सर्वे1991 में इस मामले को लेकर दायर की गई थी याचिकाकहा जाता है कि औरंगजेब ने 1664 में मंदिर तुड़वाकर मस्जिद बना दी थीवाराणसीउत्तर प्रदेश के अयोध्या के बाद वाराणसी जिले के काशी विश्वनाथ परिसर में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर खींचतान शुरू हो गई है। गुरुवार को वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक की कोर्ट ने विवादित ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही एक बार फिर यह विवादित मामला चर्चा का केंद्र बन गया है।ज्ञानवापी को लेकर हिन्दू पक्ष की ओर से ये दावा किया जाता है कि विवादित ढांचे के फर्श के नीचे 100 फीट ऊंचा आदि विशेश्वर का स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग स्थपित है। यही नहीं विवादित ढांचे के दीवारों पर देवी देवताओं के चित्र भी प्रदर्शित है।250 साल पुराना मंदिर होने के सबूतयाचिकाकर्ता ने कहा था कि मंदिर का निर्माण लगभग 2,50 साल पहले महाराजा विक्रमादित्य ने करवाया था। यहां पर लोग पूजा करते थे। विवादित स्थल के भूतल में तहखाना और मस्जिद के गुम्बद के पीछे प्राचीन मंदिर की दीवार का दावा किया जाता है। ज्ञानवापी मस्जिद के बाहर विशालकाय नंदी हैं, जिसका मुख मस्जिद की ओर है। इसके अलावा मस्जिद की दीवारों पर नक्काशियों से देवी देवताओं के चित्र उकेरे गए हैं। स्कंद पुराण में भी इन बातों का वर्णन है।Gyanvapi Masjid Case: ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देगा वक्फ बोर्ड1664 में किया गया नष्टकहा जाता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर को औरंगजेब ने 1664 में इसे नष्ट कर दिया था और इसके अवशेषों का उपयोग मस्जिद बनाने के लिए किया, जिसे मंदिर की भूमि के एक हिस्से पर ज्ञानवापसी मस्जिद के रूप में जाना जाता है।1991 में दाखिल हुआ था पहला केसकाशी विश्वनाथ ज्ञानवापी केस में 1991 में वाराणसी कोर्ट में मुकदमा दाखिल हुआ था। इस याचिका कि जरिए ज्ञानवापी में पूजा की अनुमति मांगी गई थी। प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लार्ड विशेश्वर की ओर से सोमनाथ व्यास,रामरंग शर्मा और हरिहर पांडेय बतौर वादी इसमें शामिल हैं। मुकदमा दाखिल होने के कुछ दिनों बाद ही मस्जिद कमिटी ने केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए प्लेसेज ऑफ वर्शिप (स्पेशल प्रॉविजन) ऐक्ट, 1991 का हवाला देकर हाईकोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साल 1993 में स्टे लगाकर यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया था।Kashi Vishwanath Gyanvapi Case: अयोध्या की तरह काशी की ज्ञानवापी मस्जिद की खुदाई कराएगा ASI, कोर्ट का आदेश2019 से शुरू हुई सुनवाईस्टे ऑर्डर की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद साल 2019 में वाराणसी कोर्ट में फिर से इस मामले में सुनवाई शुरू हुई। तारीख दर तारीख सुनवाई के बाद गुरुवार को वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट से ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दी है।ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ