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देवरिया में बीजेपी की जिला पंचायत सदस्य उम्मीदवारों की सूची जारी, अनारक्षित सीटों पर नहीं मिले सामान्य उम्मीदवार

देवरिया में बीजेपी की जिला पंचायत सदस्य उम्मीदवारों की सूची जारी, अनारक्षित सीटों पर नहीं मिले सामान्य उम्मीदवार

देवरियाबीजेपी ने देवरिया के जिला पंचायत सदस्य पद के सभी 56 वार्डों के उम्मीदवारों की सूची घोषित कर दी है। सूची में अधिकांश पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर नए चेहरों को जगह दी गई है। हाल ही में दल बदल कर भाजपाई हुए एक नेता को प्रत्याशी बनाए जाने से चुनावी तैयारी में लगे पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने लगी है। कई सामान्य वार्डों से भी पिछड़ी जाति के लोगों को उम्मीदवार बनाया दिया गया है। पूर्व और वर्तमान विधायक के बेटों को नहीं मिला टिकटजिला पंचायत सदस्य उम्मीदवारों की घोषणा होने के बाद पार्टी में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। बरहज विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुरेश तिवारी के पुत्र संजय तिवारी एवं पूर्व विधायक प्रमोद सिंह के बेटे को उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। अनारक्षित सीटों पर भी नहीं मिले सामान्य उम्मीदवारजिला पंचायत सदस्य के कई सामान्य वार्डों से भी पार्टी ने पिछड़ी जाति के लोगों को उम्मीदवार बना दिया है । जिसको लेकर सवर्ण खेमे में नाराजगी देखी जा रही है। जैसे वार्ड नंबर-16 बैतालपुर दक्षिणी, वार्ड नंबर-54 देवरिया उत्तरी मध्य, वार्ड नंबर-55 देवरिया पश्चिमी समेत कुछ सीटें अनारक्षित होने के बावजूद यहां से पिछड़ी जाति के लोगों को उम्मीदवार बनाया गया है। जिसके चलते पार्टी के सवर्ण खेमे में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। बीते लोकसभा चुनाव में ही भाजपाई बने धनंजय राव को पार्टी ने वार्ड नंबर-11 रामपुर कारखाना मध्य से उम्मीदवार घोषित किया है। धनंजय राव इसके पहले कई दलों में रहे हैं और बीते लोकसभा चुनाव के दौरान ही उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी। उनको उम्मीदवार बनाए जाने से इस क्षेत्र के पुराने कार्यकर्ता बगावत के मूड में दिखाई दे रहे हैं। अनारक्षित है जिला पंचायत अध्यक्ष की सीटदेवरिया का जिला पंचायत अध्यक्ष सत्ता के हिसाब से तय होता रहा है। प्रदेश में जिस दल की सरकार रही उसी दल का नेता आरक्षण के हिसाब से जिपं अध्यक्ष चुना जाता रहा है। इस बार अध्यक्ष पद सामान्य होने के चलते सदस्य पद की हर सीट पर गहमागहमी तेज है। यही वजह थी कि विधायक सुरेश तिवारी एवं पूर्व विधायक प्रमोद सिंह अपने अपने बेटों को पार्टी उम्मीदवार घोषित कराने के लिए ताकत लगाए हुए थे । दोनों नेता पुत्रों को अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार भी माना जा रहा था, मगर सदस्य का टिकट न मिलने से उनकी संभावनाओं पर पानी फिर गया है।