जनेऊधारी ब्राम्हण का रूप धरकर बहुरूपीये राहुल गांधी आज गुपचुप तरीके से मुस्लिम बुद्धिजीवियों से मुलाकात की तो उनके द्वारा राहुल गांधी को सलाह दी गई कि वे सिर्फ मुस्लिमों के हित के बारे में बात न करें बल्कि पूरे देश की हित की सोचें।
अतएव देश की एकता में बाधक न मुस्लिम हैं न हिन्दू। यदि कोई देश की एकता को भंग करना  चाहता है तो वह है कांग्रेस की सत्ता लोलुपता व उसके द्वारा राहुल गांधी को येन-केन-प्रकारेण प्रधानमंत्री बनाने की लोलुपता।
जिस प्रकार से हिन्दूस्तान का विभाजन पंडित नेहरू और जिन्ना की सत्ताधीश बनने की लालसा ने अपने-अपने विभाजित देशों के प्रमुख बनने की तमन्ना के कारण हुआ उसका प्रगटीकरण अब शशि थरूर ने केरल के त्रिवेंद्रम में कर दिया है।
यहॉ यह उल्लेखनीय है कि वहॉ शशि थरूर द्वारा यह कहने पर कि यदि भाजपा का शासन हुआ तो देश हिन्दू पाकिस्तान बन जायेगा । यही डर नेहरू पैदा करते रहे हैं।
नेहरू के समकक्ष खड़े होने के लिये कन्वर्टेड हिन्दू फैमिली मेें पैदा हुए जिन्ना ने मुस्लिमों के दिलों में पैदा किया।
उसी का स्मरण शशि थरूर को हुआ है और  उन्होंने हिन्दू पाकिस्तान का अविष्कार कर लिया। इसका समर्थन पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कर दिया है।
यहॉ यह उल्लेखनीय है कि अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में जिन्ना की फोटो लगी हुई थी। उस जिन्न को फिर से जगाने के लिये वहॉ वे एक कार्यक्रम में गये थे। इसी प्रकार से शशि थरूर के वक्तव्य में जो विभाजनकारी जिन्न प्रवेश किया हुआ है उसे जगाने के लिये आज सर्वप्रथम हामिद अंसारी ही आगे आए हैं। देश में वे ही एक नेता ऐसी इच्छा जाहिर किये हैं कि देश हिन्दू पाकिस्तान बन जाये।
राहुल गांधी चुप हैं। उनकी चुप्पी का कारण भी है। जिस प्रकार से यूपीए शासनकाल में नटवर सिंह ने कहा था कि सोनिया गांधी की इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता उसी प्रकार से हम अब कह सकते हैं कि राहुल गांधी की कांग्रेस में राहुल गांधी के बिना पत्ता भी नहीं हिल सकता अर्थात उन्हीं की इच्छा से शशि थरूर ने वक्तव्य दिया है।
यूपीए शासनकाल में तत्कालीन गृहमंत्री शिंदे और पी चिदंबरम ने हिन्दू आतंक, सैफरन टेरर शब्दों की रचना की थी।
इसका प्रचार अमेरिका में राहुल गांधी ने किया था। वहॉ पर अमेरिकी नेताओं की उपस्थिति में उन्होंने कहा था कि भारत को खतरा लश्कर से नहीं वहॉ उभरती हिन्दू शक्तियों से है। यह कहकर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारत में मुस्लिमों में डर है।
इसी भावना का प्रकटीकरण पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने अपने रिटायरमेंट के तुरंत बाद प्रकट किया था। इसी डर को पैदा करने के लिये  हामिद अंसारी बाद में केरल में आईएसआईएस से संबंधित पीएफआई के कार्यक्रम में सम्मिलित हुए थे।
यहॉ पीएफआई के बारे में इतना ही कहना पर्याप्त है कि अभी पिछले हफ्ते ही केरल में कांग्रेस से संबंधित एसएफआई कार्यकर्ता की अभिमन्यु की पीएफआई के एक्टिविस्ट द्वारा की गई। यह वहॉ की केरल की पुलिस व सरकार ने जांच के बाद कहा है। सिर्फ अभिमन्यु ही नहीं बल्कि अन्य हिन्दू युवकों की हत्या इसी प्रकार से पीएफआई द्वारा हुई है चाहे वे कांग्रेस से संबंधित हों या आरएसएस से।
इसी प्रकार की हत्याएं कर्नाटक में भी हुई हैं। इस अपराध में वहॉ की उस समय की कांग्रेस सरकार ने गिरफ्तारी पीएफआई के कार्यकर्ताओं की की थी। परंतु विधानसभा चुनाव के समय उनकी रिहाई का भी आदेश दे दिया गया था। ्र
इस प्रकार से हम देख रहे हैं कि जो नीति मुस्लिम तुष्टिकरण की कांग्रेस ने देश के विभाजन के पूर्व अपनाई थी वही नीति पर अभी भी चल रही है। इसी कारण से जिन्ना के जिन्न का प्रवेश हामिद अंसारी में हुआ है।
पुन: मैं इस संपादकीय में इसी सच को प्रकट करना चाहूंगा कि न हिन्दू समाज और न मुस्लिम समाज देश के हितों के विरूद्ध है। यही कारण है कि मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने राहुल गांधी को समझाने का प्रयास किया कि वे सिर्फ मुस्लिमों की बात न करें बल्कि पूरे देश के हित के बारे में सोचें।
तात्पर्य यही है कि यहॉ पर भी पीएम मोदी के ये वाक्य सबका साथ सबका विकास अर्थात १२५ करोड़ भारतीयों का विकास की ही अभिव्यक्ति मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने की है।
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम सबको सम्मति दे भगवान।

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