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Editorial:आतंकियो का साथ देने वाले चीन के प्रस्ताव का विरोध आवश्यक 

5-10-2022

चीन को वैश्विक स्तर पर मात देने में भारत हमेशा से आगे रहा है। चीन‌ किसी भी कीमत पर नहीं चाहता है कि भारत या अन्य कोई छोटा देश परमाणु ऊर्जा से लैस हो और वह आर्थिक स्तर पर चीन को टक्कर दे सके।‌ वहीं भारत स्वयं को तो समृद्ध करना चाहता है लेकिन उसकी मंशा किसी अन्य को परेशान करने की कभी नहीं रही है। वहीं वैश्विक संगठन AUKUS के खिलाफ चीन एक प्रस्ताव लाने वाला था लेकिन भारत के विरोध ने चीन की सिट्टी-पिट्टी गुल हो गई है और इसके जरिए भारत ने चीन से अपना पुराना हिसाब किताब बराबर कर लिया है।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA ) का सामान्य सम्मेलन 26-30 सितंबर को वियना में आयोजित किया गया था। जहां चीन ने ऑस्ट्रेलिया को पारंपरिक हथियारों से लैस परमाणु-संचालित पनडुब्बियां प्रदान करने की मांग के लिए AUKUS के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करने का प्रयास किया था। चीन ने इस IAEA में आस्ट्रेलिया की इसी परमाणु ऊर्जा वाली मांग को गलत बताते हुए AUKUS के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित करने की कोशिश की लेकिन उसने मुंह की खाई है।

चीन किसी भी कीमत पर यह नहीं चाहता था कि AUKUS के सदस्य आस्ट्रेलिया को इस तरह की सहमति दें। लेकिन भारत ने चीन के इस प्रस्ताव का विरोध किया है। भारत की चतुर कूटनीति ने चीन के प्रयास को विफल कर दिया और उसने प्रस्ताव वापस ले लिया है।

गौरतलब है कि कई बार ऐसे मुद्दे सामने आते हैं कि जब वैश्विक पटल भारत को चीन समेत अंतरराष्ट्रीय शक्तियों की आवश्यकता होती है लेकिन ऐसे मुद्दों पर चीन ही भारत के खिलाफ खड़ा होकर भारत को परेशान करने की कोशिश करता है। पाकिस्तान का कुख्यात आतंकवादी मौलाना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन ने पाकिस्तान का बचाव करते हुए हर बार भारत को नीचा दिखाया है।

वहीं परमाणु ऊर्जा से संबंधित सम्मेलन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चीन द्वारा लाए गए प्रस्ताव का विरोध कर भारत में उनके मंसूबों पर पानी फेरते हुए अपने मौलाना मसूद अजहर वाले कांड का बदला ले लिया है जो कि चीन के लिए एक बड़ा झटका है।

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