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Editorial:सभी को ‘ईज ऑफ जस्टिस मुहैया कराना हो लक्ष्य

3-8-2022

क़ानून के समक्ष सभी एक समान होते हैं। कोई पक्षपात न हो जाए इसलिए आँख पर पट्टी बांध सबको समान रखने की प्रक्रिया में कानून को अंधा तक कहा जाता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि न्याय अंतिम व्यक्ति तक भी सुलभता से पहुँच जाए। न्याय की सुगमता अर्थात् Ease of Justice पर ज़ोर देते हुए पीएम मोदी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि “न्यायपालिका से कानूनी सहायता का इंतजार कर रहे विभिन्न जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की रिहाई में तेजी लाई जानी चाहिए।” यह सर्वविदित है कि न्याय पाना और माँगना किसी भी व्यक्ति के लिए उसका सैद्धांतिक अधिकार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को न्यायपालिका से कानूनी सहायता के अभाव में जेल में बंद विचाराधीन कैदियों की रिहाई में तेजी लाने के लिए जोर दिया।

नई दिल्ली में पहली अखिल भारतीय जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण बैठक के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए, “पीएम मोदी ने सभी के लिए न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने में कानूनी सहायता की भूमिका को रेखांकित किया। विशेष रूप से हाशिए के वर्गों ने हमेशा न्यायिक प्रणाली में विश्वास व्यक्त किया है। आज से कुछ दिन बाद देश अपनी आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है। यह हमारी आजादी के अमृत का समय है। यह समय उन संकल्पों को लेने का है जो देश को अगले 25 वर्षों में नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। न्याय की सुगमता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना कि व्यापार करने में सुगमता और देश की इस यात्रा में जीवन की सुगमता।”

पीएम मोदी ने कहा कि “आम आदमी का मानना ​​है कि अगर कोई नहीं सुनता तो अदालत के दरवाजे हमेशा खुले रहते हैं। न्याय में यह विश्वास हर देशवासी को यह एहसास कराता है कि देश की व्यवस्था उसके अधिकारों की रक्षा कर रही है। इस विचार के साथ, राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (NALSA) की स्थापना की गई, ताकि सबसे कमजोर से कमजोर को भी न्याय का अधिकार मिल सके।” विचाराधीन कैदियों के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जो देश भर की जेलों में दो-तिहाई कैदियों का गठन करते हैं। पीएम मोदी ने डीएलएसए के लिए एक भूमिका निर्धारित की जिसकी अध्यक्षता जिला न्यायाधीश करते हैं। जो विचाराधीन समीक्षा समितियों का नेतृत्व भी करते हैं।

बैठक में भाग लेने के लिए देश भर के जिला न्यायाधीशों की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने न्यायिक अधिकारियों से जिला स्तरीय विचाराधीन समीक्षा समितियों के अध्यक्ष के रूप में उनकी क्षमता में विचाराधीन कैदियों की रिहाई में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने कानूनी सहायता के माध्यम से विचाराधीन कैदियों की रिहाई पर एक केंद्रित अभियान चलाने के लिए NALSA की भी सराहना की।

पीएम मोदी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना के संबोधन के बाद बात की जिसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ने जिला न्यायिक अधिकारियों से “विचाराधीन कैदियों के लिए बहुत योग्य राहत” हासिल करने में हस्तक्षेप करने की अपील की। इससे पहले जो नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, न्यायमूर्ति उदय यू ललित ने इस कार्यक्रम में बात की एक प्रणाली को संस्थागत बनाने के लिए अधिकतम संभव जिलों में कानूनी सहायता रक्षा वकील कार्यालयों को स्थापित करने के लिए नालसा की योजना की घोषणा की ताकि लोगों को एक कानूनी सहायता की बेहतर और सुगम पहुंच और प्रणाली मिल सके।

यह सत्य है कि आज भी विचाराधीन केस पर सिर्फ़ धूल फांक रहे हैं। अनेंकों क़ैदी बस इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि वो कब तक न्याय पा पाएँगे या अपनी दलील रख पाएँगे। ऐसे में पीएम मोदी का ‘Ease of Justice’ पर सबका ध्यान आकर्षित करना और उसको बढ़ावा देना इस बात की पुष्टि करता है कि जेल तंत्र में जबरन आरोप के साथ वर्षों से न्याय का इंतज़ार और स्वयं को उस परिधि से निकालने की आस लगाए बैठे हैं। पीएम मोदी ने निश्चित रूप से त्वरित सुनवाई करने का निर्देश देने की जवाबदेही ज़िला स्तर की अदालतों को सौंपी है जो शीघ्रातिशीघ्र विचाराधीन कैदियों की रिहाई के लिए काम करेंगी।

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