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UP School: सरकारी स्कूलों में अब कॉन्वेंट की तर्ज पर पढ़ाई, 2017 के पहले नंगे पैर जाते थे बच्चे… सीएम योगी का बड़ा दावा

UP School: सरकारी स्कूलों में अब कॉन्वेंट की तर्ज पर पढ़ाई, 2017 के पहले नंगे पैर जाते थे बच्चे... सीएम योगी का बड़ा दावा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कहा है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में भी बच्चों को कॉन्वेंट जैसी पढ़ाई कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्कूलों में अब बच्चे खाली पैर स्कूल नहीं आते हैं। प्रॉपर यूनिफॉर्म में आते हैं। पैरों में जूते होते हैं। कंधे पर बस्ता होता है। सरकार की योजना ने स्कूलों की स्थिति में बड़ा बदलाव लाया है। यह बदलाव बच्चों के भीतर प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित कर रहा है। वर्ष 2017 से वर्ष 2022 की स्थिति तुलना करते हुए सीएम ने कहा कि उस समय बच्चों को नंगे पैर स्कूल जाना पड़ता था। सीएम ने करीब 1 करोड़ 91 लाख बच्चों के अभिभावकों के खातों में 1200-1200 रुपये जारी किए। यह राशि ड्रेस और स्टेशनरी खरीद के लिए जारी की गई। यूपी सरकार ने डीबीटी के माध्यम से सीधे अभिभावकों के खाते में यह राशि भेजी। इससे बिचौलिया सिस्टम पूरी तरह से खत्म हुआ है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राशि ट्रांसफर कार्यक्रम में कहा कि वर्ष 2017 से पहले मैं प्रदेश के कई स्कूलों में गया। उस समय स्कूलों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। बहुत जगहों पर स्कूलों के भवनों पर बड़े-बड़े पेड़ उगे हुए थे। कुछ जगहों पर यह पता ही नहीं चलता था कि यह स्कूल है या बगीचा। झाड़ी के बीच से जैसे-तैसे बच्चे स्कूल आते जाते थे। कहीं शिक्षक नहीं होते थे, तो कहीं छात्र नहीं होते थे। उन्होंने कहा कि मुझे याद है कि वर्ष 2017 के पहले 60 से 70 प्रतिशत छात्रों को नंगे पैर स्कूल आने के लिए मजबूर होना पड़ता था। अब जब दो यूनीफार्म, जूते-मोजे, स्वेटर, बैग आदि मिलना बच्चों को शुरू हुआ तो आज बेसिक शिक्षा परिषद का हर छात्र इस बात पर गौरव महसूस करता है कि मैं भी किसी पब्लिक और कॉन्वेंट स्कूल की तर्ज पर अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का हकदार हूं।

आपरेशन कायाकल्प में विद्यालय हुए दर्शनीय
सीएम योगी आदित्यनाथ सोमवार को आईजीपी में आयोजित बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के छात्रों को यूनीफार्म, जूता मोजा, स्कूल बैग के साथ स्टेशनरी के लिए डीबीटी के माध्यम से धनराशि हस्तातंरित कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों को उनके कर्तव्य की शपथ दिलाई और स्कूलों की साफ-सफाई को लेकर प्रधानाध्यापक के साथ ग्राम प्रधान को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक लाख 62 हजार शिक्षकों की तैनाती बेसिक शिक्षा परिषद और माध्यमिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में की गई है।

सीएम ने कहा कि आपरेशन कायाकल्प के माध्यम से विद्यालयों में केंद्र और राज्य सरकार के साथ जन प्रतिनिधियों, अधिकारियों, पुरातन छात्रों ने मिलकर सुविधाएं दी। यही वजह है कि आपरेशन कायाकल्प में बहुत सारे विद्यालय आज दर्शनीय हुए हैं। बेसिक शिक्षा परिषद को इस पूरे कार्यक्रम के लिए सीएम ने धन्यवाद दिया। कहा कि यह कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ते रहना चाहिए। कोरोना लॉकडाउन के दौरान भी पढ़ाई जारी रहने के मामले का भी जिक्र किया।

लगातार बढ़ रही छात्रों की संख्या
सीएम ने कहा कि सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। उन्होंने कहा कि पांच साल पहले बेसिक परिषद के स्कूलों की क्या हालत थी, यह सब जानते हैं। पिछले पांच सालों में आपने जो मेहनत की, उसी का परिणाम है कि आज बेसिक शिक्षा परिषद विश्वास का प्रतीक बन गया है। विद्यालय में बच्चों की 1 करोड़ 34 लाख छात्र आते थे। यह संख्या अब बढ़कर 1 करोड़ 91 लाख के पार तक पहुंच गई है। भारत सरकार ने स्वच्छता और साफ-सफाई के लिए स्कूलों को प्रोत्साहित करने के लिए स्वच्छ स्कूल प्राइज दिए जा रहे हैं।

सीएम ने कहा कि इसमें प्रदेश के 900 से अधिक स्कूलों फाइव स्टार रेटिंग मिली है। इसमें से 26 स्कूलों को सरकार की ओर से पुरस्कृत किया जा रहा है। सीएम ने 9 स्कूलों को पुरस्कार बांटे। विद्यांजलि कायाकल्प पोर्टल को भी लॉन्च किया गया। प्रदेश के 6 लाख शिक्षकों का प्रशिक्षण चल रहा है।

सीएम ने पूरी की कृति की मुराद
कनौज के बिरतिया की रहने वाली 5 साल की कृति दुबे ने प्रधानमंत्री को चिट्टी भेजकर स्कूल में पेंसिल खो जाने पर दोबारा मां से पेंसिल मांगने पर मारने की शिकायत की थी। हालांकि, कृति की समस्या का समाधान पहले ही सीएम कर चुके थे। सरकार के स्तर पर 7 दिन पहले ही बेसिक शिक्षा परिषद के बच्चों को डीबीटी के माध्यम से दी जाने वाली 1100 रुपये की धनराशि में पेंसिल, रबड़ आदि स्टेशनरी के लिए 100 रुपये की धनराशि बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री ने स्टेशनरी के लिए सौ रुपये की धनराशि बढ़ाकर डीबीटी के माध्यम से छात्रों के अभिभावकों को दी जाने वाली धनराशि को 1200 रुपये कर दिया। अब कृति को स्कूल में पेंसिल खो जाने पर दोबारा पेंसिल मांगने पर मां से मार नहीं खानी पड़ेगी।

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