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Kanpur News: कानपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों का आरोप, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी, पास करने में प्राइवेट कॉलेजों के छात्रों से भेदभाव!

Kanpur News: कानपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों का आरोप, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी, पास करने में प्राइवेट कॉलेजों के छात्रों से भेदभाव!

कानपुर: सीएसजेएम कानपुर यूनिवर्सिटी में बीपीटी और बीएमएम कोर्सों में फेल हुए छात्र-छात्राओं को पास करने के नाम पर भेदभाव के आरोप लगे हैं। छात्रों का कहना है कि फेल हुए यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को तो रिविजन के नाम पास कर दिया गया, लेकिन निजी कॉलेजों में पढ़ने वालों को पास नहीं किया गया है। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ है। ओएमआर शीट के कंप्यूटर से मूल्यांकन के बावजूद रिजल्ट अलग कैसे हो सकते हैं। इसकी जांच की जानी चाहिए।

छात्रों के अनुसार, कोविड के चलते साल-2021 में बीपीटी और बीएमएम कोर्स की नियमित परीक्षाओं की जगह सितंबर-2021 में वैकल्पिक सवालों के साथ परीक्षाएं हुईं। चार विषयों से 20-20 प्रश्न लेकर हर छात्र को 90 मिनट में 80 प्रश्न हल करने थे। आरोप है कि परीक्षा कक्ष में निरीक्षकों ने कहा था कि यह एग्जाम सिर्फ औपचारिकता है और हर कोई पास हो जाएगा। इससे परीक्षार्थी शिथिल हो गए। अक्टूबर-2021 में आए रिजल्ट में काफी छात्र-छात्राएं फेल हो गए। चौबेपुर के साईं कॉलेज के तो तकरीबन 70 प्रतिशत छात्र-छात्राएं फेल हुए। इसके बाद बैकपेपर का विकल्प आया।

छात्रों का आरोप है कि बैकपेपर के रिजल्ट में विश्वविद्यालय कैंपस में बने यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेस के परीक्षार्थी पास हो गए, लेकिन निजी कॉलेजों के परीक्षार्थियों पर आफत आ गई। सिर्फ 4 या 6 अंक से पास होने से दूर छात्र पास नहीं किए गए, जबकि कई केस ऐसे मिले, जिसमें किसी के 22 तो किसी के 84 अंक तक बढ़ा दिए गए।

विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रहित में ही फैसले लेता है। ना भेदभाव हुआ है और ना ही होगा।

विशाल शर्मा, पीआरओ, CSJM यूनिवर्सिटी, कानपुर

विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को बताया कि रिजल्ट बेस्ट-40 जवाबों के आधार पर बना है। लंबी जद्दोजहद के बाद स्पेशल बैक पेपर का प्रस्ताव 31 मई को परीक्षा समिति में पास हो गया। अब समस्या है कि स्पेशल बैक पेपर के आवेदन और परीक्षा में एक महीना लगेगा। अगले एक महीने में रिजल्ट आएगा। ऐसे में छात्र अपने साथियों से पीछे छूट जाएंगे।

छात्रों का यह भी आरोप है कि पहले बैक पेपर में जो फेल हुए, उनका रिजल्ट विवि प्रशासन ने अपने विवेक से संशोधित कर दिया, लेकिन बाकी छात्रों की उपेक्षा हो रही है। यह भी आरोप है कि एग्जाम शीट जब कंप्यूटर से चेक हो रही है तो बार-बार रिजल्ट कैसे बदल रहे हैं। विवि प्रशासन ने छात्रों का आश्वस्त किया था कि पूर्णांक 80 में अधिकतम 10 प्रतिशत अंक ही बढ़ाए जा सकते हैं, लेकिन इन नियमों को किनारे कर दिया गया है।

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