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बालू की कालाबाजारी, प्रति हाइवा 15000 की जगह 75 हजार में मिल रहा, सीएम करें हस्तक्षेप : चैंबर अध्यक्ष

बालू की कालाबाजारी, प्रति हाइवा 15000 की जगह 75 हजार में मिल रहा, सीएम करें हस्तक्षेप : चैंबर अध्यक्ष

बालू की किल्लत को लेकर झारखंड चैंबर, बालू एसोसिएशन व बिल्डर्स एसोसिएशन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

Ranchi :  राजधानी समेत पूरे झारखंड में बालू की किल्लत हो गयी है. उसका दाम बढ़ने के साथ ही इसकी कालाबाजारी भी बढ़ गयी है. बालू की कमी के चलते रियल स्टेट के कारोबारियों समेत भवन निर्माण से जुड़े लोगों का काम मंदा चल रहा है. बालू की समस्या और कालाबाजारी को देखते हुए फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, बालू एसोसिएशन और बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने सोमवार को संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस की. मौके पर झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष धीरज तनेजा ने कहा कि कालाबाजारी के कारण जो बालू पहले 15 हजार प्रति हाइवा मिलता था, अब 75 हजार रुपये तक मिल रहा है. बालू की कमी के कारण राज्य में  निर्माण कार्य बंद है.  इस कार्य में संलग्न दैनिक मजदूरों के समक्ष आजीविका का संकट है. सीमेंट, स्टील, टाईल्स, सेनिटरी वेयर का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है. यह भी चिंतनीय है कि स्मॉर्ट सिटी के निर्माण कार्य में संलग्न एलएंडटी कंपनी भी अपना काम बंद कर चुकी है.

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बालू की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित हो

चैंबर अध्यक्ष ने कहा कि इस सिलसिले में विभागीय सचिव से मिलने का प्रयास किया गया, पर मुलाकात नहीं हो पायी. कहा कि मुख्यमंत्री के पूर्व के कथनों से यह स्पष्ट है कि वे भी चाहते हैं कि राज्य में बालू की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित हो. किंतु विभागीय उदासीनता के कारण स्थिति और विकट हो गई है. मुख्यमंत्री को इस मामले में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है.

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पश्चिम बंगाल से मंगवाया जाये बालू

चैंबर महासचिव राहुल मारू ने कहा कि पड़ोसी राज्य से बालू की आपूर्ति किये जाने के लिए हमने विभागीय सचिव से 1 जून को ही बात की थी. किंतु उन्होंने इस मामले में रुचि नहीं दिखाई. एनजीटी की गाइडलाइन के तहत 10 जून से राज्य में बालू खनन पर रोक प्रभावी है. किंतु पश्चिम बंगाल में यह 30 जून से प्रभावी हो रहा है. ऐसे में 10 दिन का समय अभी भी बचा हुआ है. यदि राज्य सरकार पहल करे, तो राज्य के स्टॉकिस्ट इसके लिए तैयार हैं. इससे बालू की कालाबाजारी बंद होगी.  राज्य में निर्माण कार्य निर्बाध रूप से चलेंगे और बालू की आसान उपलब्धता सुनिश्चित हो पायेगी.

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