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शिक्षा के साथ सामाजिक दायित्व भी निभा रहा है एकेटीयू

डॉ0 एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय सिर्फ शैक्षणिक गतिविधियों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक सरोकार में भी भागीदार बन रहा है। वर्तमान कुलपति प्रो0 प्रदीप कुमार मिश्र को हाल ही में आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेकर सुविधा सम्पन्न बनाने के लिए माननीय राज्यपाल ने सम्मानित किया है। यही नहीं विश्वविद्यालय और इससे सम्बद्ध संस्थान ने पूरे प्रदेश में कई गांवों को गोद लेकर कई तरह के विकास कार्य कर रहे हैं। साथ ही अनाथ बच्चों को विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने गोद लेकर उनका पूरा खर्च उठाया। विश्वविद्यालय और इससे संब़द्ध संस्थानों ने कोरोना के चलते जिंदगी की जंग हारने वाले कर्मियों के परिजनों के संबल बने।
विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध संस्थानों ने सामाजिक सरोकार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए गांवों को गोद लिया। विश्वविद्यालय के अधिकारी व कर्मचारी अपने कार्यालयी जिम्मेदारियों के बीच गांवों में जाकर वहां की समस्याओं को जाना। फिर उन समस्याओं को दूर करने के लिए तमाम प्रयास किये। ग्रामीणों से मिलकर उनसे जानकारी ली। साफ-सफाई से लेकर शिक्षा तक पर काम किया। उन्नत खेती के बारे में किसानों को विशेषज्ञों ने जानकारी दी। खेती में तकनीकी का प्रयोग कर उपज बढ़ाने के बारे में बताया गया। साथ स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूकता लाने का प्रयास किया। युवाओं के पलायन को रोकने के लिए स्वरोजगार के प्रति जागरूक किया। विश्वविद्यालय और संस्थान द्वारा मिर्जापुर गांव, रसूलपुर, कचेरा वर्षाबाद, दुरियाई, महरौली, जवेरी, कर्सुआ, नडोरी सहित दर्जनों गांवों को गोद लिया गया। कुलपति प्रो0 प्रदीप कुमार मिश्र जी का कहना है कि विश्वविद्यालय शैक्षणिक दायित्वों के साथ ही सामाजिक जिम्मेदारियों को निभा रहा है। हमारा प्रयास है कि तकनीकी का लाभ गांव और किसानों को मिले। युवाओं को उद्यमिता के प्रति जागरूकता लाने का प्रयास है, इसके लिए जो भी जरूरी होगा हम करेंगे। साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों को सुविधा सम्पन्न बनाने में सहभागी बन रहे हैं। आगे भी संस्थान ऐसे कार्य करता रहेगा।
एकेटीयू गांवों का ही विकास नहीं कर रहा है बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों को भी सुविधा सम्पन्न बनाने में जुटा है। अब तक विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध संस्थानों ने 286 आंगनबाड़ी केंद्रों को सुविधा सम्पन्न बनाने का काम किया है। फिलहाल 11 नये आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लिया गया है। हाल ही में कुलपति प्रो0 प्रदीप कुमार मिश्र के मार्गदर्शन में इन केंद्रों पर जरूरी सामानों का वितरण किया गया है।
एकेटीयू सिर्फ गांवों के विकास तक सीमित नहीं रहा। इस संस्थान ने टीबी रोगियों को इस बीमारी से दूर करने में महती भूमिका निभाई। विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध संस्थान ने टीबी से ग्रसित 21 बच्चों को गोद लिया। इन बच्चों को अस्पताल के जरिये निशुल्क दवा और जांच की व्यवस्था की गयी। साथ ही पौष्टिक आहार, फल, बिस्किुट, ड्राई फ्रूट की उपलब्धता विश्वविद्यालय कराता था। यही नहीं सेहत की जानकारी के लिए व्यक्तिगत संपर्क किया जाता था, जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह भी दी जाती थी। फलस्वरूप विश्वविद्यालय और कॉलेजेज के गोद लिये बच्चे जल्द ही स्वस्थ हो गये।
विश्वविद्यायल अपने शिक्षकों और छात्रों को एक परिवार की तरह मानता है। इसका प्रमाण कोरोना के दौरान देखने को मिला। कोरोना के दौरान पूरी दुनिया में लाखों लोगों ने अपने प्राण गंवाये। दुर्भाग्य से विश्वविद्यालय और इससे संबद्ध संस्थानों के कुछ शिक्षकों और छात्रों के परिजन इस वायरस की चपेट में आकर जीवन की जंग हार गये। ऐसे में विश्वविद्यालय ने आगे बढ़कर मृत शिक्षकों और छात्रों की मदद की। संस्थान ने कोरोना वायरस से मृत 21 शिक्षकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रूपये की आर्थिक सहायता दी। साथ ही 568 ऐसे छात्रों को एक-एक लाख रूपये दिये गये जिनके परिजनों में से किसी की मौत कोरोना से हो गयी।  
विश्वविद्यालय अनाथ बच्चों का सहारा बन रहा है। यहां के अधिकारी और कर्मचारियों ने श्री राम औद्योगिक अनाथालय के कुछ बच्चों को गोद लेकर उनके पढ़ाई का जिम्मा उठाया। साथ उनकी जरूरतों के मुताबिक आवश्यक वस्तुओं को भी अपने खर्चे से उपलब्ध कराया। हाल ही में विश्वविद्यालय के आविर्भाव दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में माननीय राज्यपाल सहकुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने गोद लिये दो अनाथ बच्चों को सम्मानित किया है।

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