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यूपी: सरकारें बदलीं-तस्वीर नहीं, 70 साल बाद भी बीहड़ के गांवों में सड़क और पानी ही चुनावी मुद्दा

पानी के लिए मेहनत करतीं महिलाएं

यमुना और चंबल के बीहड़ में बसे गांवों में 70 साल से सड़क और पानी चुनावी मुद्दा रहा है। तस्वीर नहीं बदली है। इस बार भी बीहड़ के इन 60 गांवों में सड़क और पीने का पानी सबसे बड़ा मुद्दा है। गांव झरनापुरा, मऊ की मडै़या, भटपुरा, गुढ़ा आदि और यमुना के बीहड़ के गांव गगनकी, बुढै़रा, बड़ापुरा, कछियारा, सुंसार, बाग गुढ़ियाना, पुराडाल आदि गांवों में रास्ते के नाम पर सिर्फ पगडंडियां हैं। बारिश के बाद यहां कीचड़ भर जाती है। कई घंटे तक वाहन फंसे रहते हैं। नौ जनवरी को सुंसार गांव की पगडंडी पर ट्रैक्टर ट्रॉली फंस गई थी। परिजन बीमार गुड्डी देवी को अस्पताल ले जा रहे थे। इलाज मिलने में देरी से महिला की मौत हो गई। कछार के गांवों में प्यास बुझाने के लिए नदी तक दौड़ लगाना मजबूरी है। पिछले विधानसभा चुनाव में सुंसार और गुढ़ा गांव के लोगों ने चुनाव के दौरान मतदान का बहिष्कार कर समस्याओं से निजात की गुहार लगाई थी लेकिन समस्या आज भी जस की तस है।

गांव में हैंडपंप से खारा पानी आता है। पानी के लिए यमुना तक जाना पड़ता है। सड़क तक पहुंचने के लिए बीहड़ में सात किमी की पगडंडी है। वाहन और इलाज के अभाव पांच साल में 12 लोगों की जान जा चुकी हैं। वोट उसी को देंगे, जो सड़क और पानी की व्यवस्था कराए। -पुत्तूलाल, गांव सुंसार

सिमराई से गुढ़ा गांव तक चार किमी चंबल के बीहड़ में वन्यजीवों के हमले के डर के बीच चलना पड़ता है। गांव की सड़क की मांग को लेकर चुनाव बहिष्कार किया। कई बार प्रार्थनापत्र दिए। सुनवाई नहीं हो रही। इस बार गांव के लोग उसी को वोट देंगे जो सड़क बनवाएगा। -जयवीर सिंह ,प्रधान गुढ़ा सिमराई

टीले पर झोपड़ी में जिंदगी बिता रहे गांव के लोग यमुना नदी से पानी लाते हैं। इसे छान कर पीते हैं। सड़क तक पहुंचने के लिए साढे़ तीन किलो मीटर बीहड़ के कच्चे रास्ते पर चलना पड़ता है। न तो गांव में पानी की टंकी लग सकी है और न ही बीहड़ में रास्ता बना है। हमेशा वन्यजीव के हमले का डर लगा रहता है। – जय नारायन, बाग गुड़ियाना

गांव के लिए करीब 5 किमी की सड़क बनी थी। अब यह सड़क टूट गई है। उसका नामोनिशान तक नहीं बचा है। बाढ़ में पुलिया भी टूट गई थी। जिसे लोगों ने श्रमदान कर बनवाया। अब सभी ने तय किया है कि सड़क बनवाने वाले को ही गांव के लोग वोट देंगे। – नेत्रपाल वर्मा, झरनापुरा

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