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चिचाड़ी (फरसगांव) में समस्त ग्रामवासियों ने गायता जोहारनी मनाया

फरसगांव विकास खंड के ग्राम हिचाड़ (चिचाड़ी) में अतिथियों का मांदर नृत्य से स्वागत करते हुए मंच तक लाया गया, सर्वप्रथम नार्र बुमयार का सेवा अर्जी कर गायता जोहारनी कार्यक्रम की शुरुआत किया गया, साथ ही नया चिवड़ा अर्पण कर महुआ फूल का रस तर्पण किया गया। नार्र गायता, पटेल, मांझी, सिरहा एवं प्रमुख सियानों के अतिरिक्त आमंत्रित अतिथियों का हल्दी चावल, महुआ फूल की माला एवं सफेद गमछा भेंटकर मंच में ससम्मान स्वागत किया गया, गांव के नवा खाई (पुनांग तिन्दना पंडुम) के बाद गायता जोहारनी में परंपरागत रूढ़ी व प्रथा (Custom) के अनुसार नार्र हुजाड़ एवं पेन हुजाड़ में शामिल बारह बानी बिरादरी समुदाय के लोग भी बड़े हर्षोल्लास से सम्मिलित थे। गायता, पटेल, मांझी, सिरहा एवं ग्राम के प्रमुख सियानों को चिवड़ा वितरण कर जोहार भेंट किया गया।

इस कार्यक्रम में तिरूमाल समरथ वट्टी ने अपने उद्धबोधन में कहा कि गांव में हमारी परंपरागत पेन बानी व्यवस्था में शामिल सभी समुदाय के लोगों का नवा खाई (पुनांग तिन्दना पंडुम) एवं गायता जोहारनी पर्व है, यही हमारी मूल संस्कृति की पहचान है, इससे ही गांव में समरसता बना रहता है, इसको बचाना हम सब का कर्तव्य है। तिरूमाल गणेश दुग्गा नगरपंचायत अध्यक्ष ने अपने उद्धबोधन में गांव की मूल संस्कृति को बचाने के लिए इस तरह के पर्व को मनाने के लिए जोर दिया है, हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है। तिरूमाल हीरासिंह मरकाम ने नार्र व्यवस्था एवं पुरखों की व्यवस्था के अनुसार गायता जोहारनी को मनाने पर जोर दिया। तिरूमाल सुखलाल मरकाम ब्लॉक उपाध्यक्ष ने अपने वक्तव्य में गोंडवाना की संस्कृति को छोड़ कर दूसरे धर्म में नहीं जाने से संबंधित गीत प्रस्तुत किया गया कि गोंडवाना की गोंडी संस्कृति हमारी मूल संस्कृति है, इस संस्कृति से ही हमारी पहचान है। इसे बचाना हम सब की जिम्मेदारी है। तिरूमाल दुलार सिंह यादव, तिरूमाल धनसिंह यादव और तिरूमाल शत्रुघ्न नेताम (लोहार) ने भी अपने उद्धबोधन म़े कहे कि नार्र हुजाड़ एवं पेन व्यवस्था के हम लोग भी अभिन्न अंग हैं, पुरखों की व्यवस्था के अनुसार एक दूसरे के पूरक हैं, इसे बचाने के लिए एक साथ रहना है। इसके अतिरिक्त अन्य वक्ता के रूप में तिरूमाल पवन नेताम, तिरूमाल मनोज मरकाम, सरपंच तिरूमाल नरसू नेताम ने नवा खाई एवं गायता जोहारनी पर विस्तार से अपनी बात रखी, इस तरह प्रति वर्ष मनाकर पुरखों की हमारी परंपरागत रूढ़ी व प्रथा (Custom) को बचाना है, तभी हमारी संस्कृति बचेगा। इस कार्यक्रम के दौरान माटी मांदरी नृत्य बरकई, गुट्टा मांदरी एवं ढोल नृत्य आंंवराभाटा, कोयतोरिंग संगीत ऊंर्जामट्टा गोटूल भंडारवंडी के टीम ने सभी का मन को मोह लिया, साथ ही गांव के लया लयोरों के रेला पाटा नृत्य ने वहाँ की माहौल को जबरदस्त आकर्षण का केंद्र बना दिया।

इस गायता जोहारनी कार्यक्रम में नार्र गायता परिवार के सदस्य मादो मरकाम, पटेल संतोष कुमार मरकाम, समरथ वट्टी, हीरासिंह मरकाम, घनश्याम मरकाम, घसिया वट्टी, चमरा वट्टी, सुखलाल मरकाम, सुंदर नेताम, लच्छमन नेताम, अर्जुन नेताम, धनी कोर्राम, बृजलाल कोर्राम, गणेश दुग्गा, पवन नेताम, मनोज मरकाम, कबिलास ठाकुर, नरसू नेताम, बली वट्टी, रावजी लाल वट्टी, लच्छमीनाथ यादव, दुलार यादव, धनसिंह यादव, शत्रुघ्न नेताम एवं गांव के सम्मानीय गणमान्य नागरिक के अतिरिक्त हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का संचालन बलराम मरकाम एवं रामप्रसाद नेताम ने बहुत ही अच्छे तरीका से किया। कार्यक्रम में शामिल सभी ग्रामवासियों को बहुत-बहुत आभार एवं सेवा जोहार करते हैं।

गायता जोहारनी कार्यक्रम के अंत में गांव वालों की ओर से ग्रामवासियों के लिए खिचड़ी एवं अतिथियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई थी।

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