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मैनपुरी में छात्रा के फांसी लगाने के मामले में हाईकोर्ट के सवालों का जवाब नहीं दे सके डीजीपी, प्रयागराज न छोड़ने का निर्देश

बरेलीः मुनाफाखोरी में मेहता सर्जिकल का शोरूम और गोदाम सील

सार
महेंद्र प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश व न्यायमूर्ति ए के ओझा की खंडपीठ ने छात्रा की मौत को लेकर कोर्ट में हाजिर डीजीपी से कुछ सवाल किए, परंतु वह उसका सही जवाब नहीं दे सके।

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मैनपुरी में स्कूली छात्रा की संदिग्ध हालत में मौत के मामले में तलब किए गए डीजीपी बुधवार को हाईकोर्ट के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। इससे नाराज कोर्ट ने उनको बृहस्पतिवार को फिर से तलब कर लिया है। कहा है कि आप आज प्रयागराज नहीं छोड़ेंगे और कल केस की पूरी जानकारी कर तैयारी के साथ फिर से हाज़िर हों। उनके साथ ही कोर्ट ने आईजी मोहित अग्रवाल और जांच कर रही एसआईटी के सदस्यों को भी हाज़िर रहने का आदेश दिया है।

महेंद्र प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश व न्यायमूर्ति ए के ओझा की खंडपीठ ने छात्रा की मौत को लेकर कोर्ट में हाजिर डीजीपी से कुछ सवाल किए, परंतु वह उसका सही जवाब नहीं दे सके। इस पर कोर्ट ने कहा कि लगता है कि डीजीपी ने इस केस की फाइल को नहीं पढ़ा है। कोर्ट ने कहा कि जरूरी है कि वह 24 घंटे प्रयागराज में रहें और घटना की सही जानकारी के साथ फिर कल हाजिर हों।

कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और डीजीपी को ने घटना का वीडियो भी दिखाया। कहा कि वीडियो में जो दिख रहा है, उसके बाद पुलिस कैसे कह रही है कि यह खुदकुशी की घटना है। पुलिस के अनुसार 16 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगा ली। किंतु उसके निजी अंगों व अंडरगारमेंट पर स्पर्म पाए गए हैं। इसके बावजूद पुलिस टीम अपराधियों तक पहुंचने में विफल रही है।

इससे पहले कोर्ट ने 24 अगस्त 21 को इस मामले की केस डायरी मंगाई थी। मंगलवार को केस डायरी के साथ एसआईटी टीम के सदस्य हाईकोर्ट में हाजिर हुए। बताया कि 16 सितंबर 19 की घटना की एफआईआर 17 जुलाई 21 को दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने कहा कि तीन माह बाद भी गंभीर आरोप के बावजूद अभियुक्तों से पूछताछ नहीं की गई। विवेचनाधिकारी ने देरी का कारण भी नहीं बताया।

मां ने लगाया था मारपीट कर फांसी पर लटकाने का आरोप
छात्रा स्कूल में फांसी पर लटकी मिली। मां ने परेशान करने व मारपीट कर फांसी पर लटकाने का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी के निशान के सिवाय शरीर पर चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। पंचनामा की फोटोग्राफी भी नहीं कराई गई है। सरकारी वकील ने बताया कि इस मामले में एसपी मैनपुरी को निलंबित कर जांच बैठाई गई थी, मगर जांच पूरी होने से पहले की वह रिटायर हो गए। कोर्ट ने कहा था कि एसपी के रिटायर होने से पहले कार्रवाई क्यों नही की गई। डीजीपी एक्शन लेकर बताएं कि उन्होंने क्या किया।
बिना होमवर्क के पहुंचे डीजीपी
बुधवार को डीजीपी हाईकोर्ट पहुंच तो गए मगर वह अदालत के सवालों का ठीक से जवाब नहीं दे सके। अदालत ने उनसे पूछा कि क्या आप ने एफआईआर पढ़ी है, उसमें क्या लिखा है तो डीजीपी कुछ बता नहीं सके। इस कोर्ट ने कहा कि लगता है आप को किसी ने बताया नहीं कि आप को यहां किसलिए बुलाया गया है। आप इस मामले की जानकारी हासिल करिए। वीडियो में दिखाते है कि क्या हुआ है। इसे देखने के बाद आप कैसे कह सकते हैं कि यह सिर्फ  खुदकुशी का मामला है। कोर्ट ने कहा सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ नहीं होने से क्या होता है। हमें पता है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट कैसे बन जाती है। कोर्ट ने डीजीपी से कहा, आप आज यहीं प्रयागराज में ही रुकिए और पूरी जानकारी लेकर कल फिर आइए।

विस्तार

मैनपुरी में स्कूली छात्रा की संदिग्ध हालत में मौत के मामले में तलब किए गए डीजीपी बुधवार को हाईकोर्ट के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। इससे नाराज कोर्ट ने उनको बृहस्पतिवार को फिर से तलब कर लिया है। कहा है कि आप आज प्रयागराज नहीं छोड़ेंगे और कल केस की पूरी जानकारी कर तैयारी के साथ फिर से हाज़िर हों। उनके साथ ही कोर्ट ने आईजी मोहित अग्रवाल और जांच कर रही एसआईटी के सदस्यों को भी हाज़िर रहने का आदेश दिया है।

महेंद्र प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश व न्यायमूर्ति ए के ओझा की खंडपीठ ने छात्रा की मौत को लेकर कोर्ट में हाजिर डीजीपी से कुछ सवाल किए, परंतु वह उसका सही जवाब नहीं दे सके। इस पर कोर्ट ने कहा कि लगता है कि डीजीपी ने इस केस की फाइल को नहीं पढ़ा है। कोर्ट ने कहा कि जरूरी है कि वह 24 घंटे प्रयागराज में रहें और घटना की सही जानकारी के साथ फिर कल हाजिर हों।

कोर्ट ने अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और डीजीपी को ने घटना का वीडियो भी दिखाया। कहा कि वीडियो में जो दिख रहा है, उसके बाद पुलिस कैसे कह रही है कि यह खुदकुशी की घटना है। पुलिस के अनुसार 16 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगा ली। किंतु उसके निजी अंगों व अंडरगारमेंट पर स्पर्म पाए गए हैं। इसके बावजूद पुलिस टीम अपराधियों तक पहुंचने में विफल रही है।

इससे पहले कोर्ट ने 24 अगस्त 21 को इस मामले की केस डायरी मंगाई थी। मंगलवार को केस डायरी के साथ एसआईटी टीम के सदस्य हाईकोर्ट में हाजिर हुए। बताया कि 16 सितंबर 19 की घटना की एफआईआर 17 जुलाई 21 को दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने कहा कि तीन माह बाद भी गंभीर आरोप के बावजूद अभियुक्तों से पूछताछ नहीं की गई। विवेचनाधिकारी ने देरी का कारण भी नहीं बताया।

मां ने लगाया था मारपीट कर फांसी पर लटकाने का आरोप
छात्रा स्कूल में फांसी पर लटकी मिली। मां ने परेशान करने व मारपीट कर फांसी पर लटकाने का गंभीर आरोप लगाया है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी के निशान के सिवाय शरीर पर चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। पंचनामा की फोटोग्राफी भी नहीं कराई गई है। सरकारी वकील ने बताया कि इस मामले में एसपी मैनपुरी को निलंबित कर जांच बैठाई गई थी, मगर जांच पूरी होने से पहले की वह रिटायर हो गए। कोर्ट ने कहा था कि एसपी के रिटायर होने से पहले कार्रवाई क्यों नही की गई। डीजीपी एक्शन लेकर बताएं कि उन्होंने क्या किया।

बिना होमवर्क के पहुंचे डीजीपी
बुधवार को डीजीपी हाईकोर्ट पहुंच तो गए मगर वह अदालत के सवालों का ठीक से जवाब नहीं दे सके। अदालत ने उनसे पूछा कि क्या आप ने एफआईआर पढ़ी है, उसमें क्या लिखा है तो डीजीपी कुछ बता नहीं सके। इस कोर्ट ने कहा कि लगता है आप को किसी ने बताया नहीं कि आप को यहां किसलिए बुलाया गया है। आप इस मामले की जानकारी हासिल करिए। वीडियो में दिखाते है कि क्या हुआ है। इसे देखने के बाद आप कैसे कह सकते हैं कि यह सिर्फ  खुदकुशी का मामला है। कोर्ट ने कहा सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुछ नहीं होने से क्या होता है। हमें पता है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट कैसे बन जाती है। कोर्ट ने डीजीपी से कहा, आप आज यहीं प्रयागराज में ही रुकिए और पूरी जानकारी लेकर कल फिर आइए।

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