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16 करोड़ खर्च होने के बाद भी सामुदायिक शौचालय अधूरे, 19 सचिवों को नोटिस

Hamirpur News: 16 करोड़ खर्च होने के बाद भी सामुदायिक शौचालय अधूरे, 19 सचिवों को नोटिस

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में 330 ग्राम पंचायतों में सोलह करोड़ की लागत से बनने वाले सामुदायिक शौचालयों के निर्माण खटाई में है। डीपीआरओ ने निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतने पर 19 सचिवों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किया है।

जिले के सुमेरपुर, कुरारा, मौदहा, मुस्करा, राठ, गोहांड और सरीला आदि ब्लॉकों के तहत सभी गांवों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण कराए जाने का प्लान बनाया गया था। 330 ग्राम पंचायतों में एक-एक सामुदायिक शौचालय बनवाए जाने के लिए 16 करोड़ से अधिक फंड का प्रावधान भी किया गया था, लेकिन तमाम ग्राम पंचायतों में ये शौचालय अभी भी अधूरे हैं। मुस्करा ब्लॉक की 13 ग्राम पंचायतों में ही सामुदायिक शौचालय आधे-अधूरे हैं। जिन्हें पंचायत चुनाव से पहले ही पूर्ण हो जाने चाहिए थे, लेकिन सचिवों की लापरवाही के कारण गांव के लोग इन शौचालयों का इस्तेमाल भी नहीं कर पा रहे हैं। शिवनी, इमिलिया ग्राम पंचायत में शौचालयों के प्लास्टर अभी नहीं हो सके, जबकि बसवारी में रंगाई-पुताई तक नहीं कराई जा सकी।

मसगांव, करगांव, भरखरी, भुगैचा सहित 13 ग्राम पंचायतों का यहीं हाल है। इन अधूरे शौचालयों को लेकर बीडीओ गोपाल यादव ने छह सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उधर, डीपीआरओ राजेन्द्र प्रसाद ने बताया कि 311 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय तैयार हो गए हैं, लेकिन 19 ग्राम पंचायतों में ये शौचालय अभी अधूरे हैं। इसके लिए 19 सचिवों के खिलाफ एक्शन लिया गया है। सचिवों को नोटिस भी जारी किया गया है। बताया कि ग्राम पंचायत में एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य 5.10 लाख रुपये की धनराशि से होना है। सभी 330 ग्राम पंचायतों में पांच लाख दस हजार रुपये के हिसाब से फंड दिया जा चुका है।

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बनते ही सामुदायिक शौचालय की छत धंसी
कैमोखर गांव में लाखों की लागत से बनाया जा रहा सामुदायिक शौचालय लूट-घसोट की भेंट चढ़ गया है। यहां मानकों को ठेंगे पर रखते हुए शौचालय का निर्माण कराया गया। घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने से शौचालय की दीवारों में दरारें आ गई हैं, जो कभी भी ये ढह सकती है और तो और शौचालय की छत भी पूरी तरह से धंस गई है। सचिव मृत्युंजय राय ने इमिलिया गांव के ठेकेदार को शौचालय बनाने का ठेका दिया था। ठेकेदार ने घटिया सामग्री से निर्माण कराया तो बनते ही ये जगह-जगह से दरारें दे गया। पूर्व प्रधान बच्चालाल वर्मा ने बताया कि प्रशासन से दूसरा नया शौचालय बनवाने की मांग की गई है। साथ ही घटिया शौचालय बनाकर सरकारी फंड की लूट-घसोट में शामिल लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

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गांवों में हवा में चल रहा है स्वच्छ भारत मिशन
ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन के तहत सामुदायिक शौचालयों के निर्माण कराकर इसके संचालन की जिम्मेवारी गांव की महिला समूहों को दी जानी है, लेकिन अभी तक शौचालयों के निर्माण पूरे नहीं हो सके। कुरारा ब्लॉक के ही 38 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के लिए 5.10 लाख रुपये की धनराशि भी अवमुक्त की गई थी, लेकिन पंचायत चुनाव के बाद चुने गए गांव के प्रधान भी इसके लिए रुचि नहीं ले रहे हैं। यहां ज्यादातर ग्राम पंचायतों में शौचालयों के निर्माण का ठेका बाहरी ठेकेदारों को दिए जाने से स्वच्छ भारत मिशन का सपना हवा में उड़ रहा है। क्षेत्र के तमाम गांवों में शौचालय के नाम पर सरकारी फंड को ठिकाने लगाया जा रहा है। कैमोखर, डामर और बसवारी समेत कई गांव के शौचालय हैं, जो बनते ही दरक गए हैं।

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