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चुनाव आते ही ममता का मुस्लिम तुष्टिकरण खेल शुरू

पश्चिम बंगाल में भवानीपुर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
इसके साथ ही ममता बैनर्जी ने मुस्लिम वोट बैंक को भूनाने के लिये अपना खेल शुरू कर दिया है। ममता बैनर्जी ने मुस्लिम वोट बैंक को निशाना बनाने के लिये धर्मपरस्त राजनीति की सीमा लांघ ली है।
ममता बैनर्जी को चुनाव आते ही मस्जिद की मजारें दिखाई देनी लगती है मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस सीट से टीएमसी के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने मुस्लिम तुष्टिकरण का खेल भी शुरू कर दिया है। टीएमसी प्रत्याशी ममता बनर्जी सोमवार को अचानक क्षेत्र की सोला आना मस्जिद पहुंच गईं। उनके साथ उनके कैबिनेट मंत्री फिरहाद हकीम भी थे। ममता के इस मस्जिद दौरे को लेकर सियासी विवाद भी शुरू हो चुका है।
ऐसा पहली बार नहीं हैं कि जब इस तरह मस्जिद का दौरा किया हो इसके पूर्व बंगाल विधानसभा चुनाव के समय भी ऐसा ही किया था।
ममता के मस्जिद दौरे पर निशाना साधते हुए बीजेपी के आईटी प्रभारी अमित मालवीय ने ट्वीट किया, “अगर आपको लगता है कि भवानीपुर एक “कोई मुकाबला नहीं” था और ममता बनर्जी को जीत का भरोसा था, तो इसे भूल जाइए। उन्हें पसानी आ रहा है। सोला आना मस्जिद का यह दौरा “अचानक” नहीं है, बल्कि वार्ड 77 से वोट मांगने के लिए एक नियोजित यात्रा है। अगले कुछ दिनों में वह एक बूथ से दूसरे बूथ तक पहुंचेंगी।”
मतदान से पहले मस्जिद का दौरा कर ममता बनर्जी ने जता दिया है कि उनके लिए धर्मनिरपेक्षता सिर्फ दिखावा है। दरअसल भवानीपुर सीट में मुस्लिमों की बड़ी आबादी है। ऐसे में ममता ने जीत के लिए मुस्लिमों का समर्थन हासिल करने के लिए कवायद शुरू कर दी है। 2011 के उपचुनाव में भवानीपुर से ही ममता पहली बार विधायक निर्वाचित हुई थीं। इसके बाद 2016 में भी चुनाव जीती थीं, परंतु, 2021 में वह भवानीपुर सीट छोड़कर नंदीग्राम से चुनाव लड़ी और हार गईं।
गौरतलब है कि भवानीपुर में 30 सितंबर को वोट डाले जाएंगे, काउंटिंग 3 अक्?टूबर को होगी। यहां से ममता बनर्जी के खिलाफ बीजेपी की उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल हैं। वहीं, दूसरी ओर माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने इस सीट से वकील श्रीजीब विश्वास को मैदान में उतारा है जबकि कांग्रेस उपचुनाव में हिस्सा नहीं ले रही है। इससे पहले बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी से चुनाव हार गई थीं। हालांकि वर्तमान में वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं लेकिन इस पद पर बने रहने के लिए कानूनन रूप से 6 महीने के भीतर ही उनका विधानसभा सीट से चुनाव जीतना अनिवार्य है। इस लिए टीएमसी विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने ममता बनर्जी के लिए भवानीपुर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया था।

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