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चीन के कर्ज से दबा श्रीलंका अब थाली का बैंगन बन भारत की शरण में

13-sep-2021

बिना पेंदी का लोटा से लेकर थाली का बैंगन तक, द्वीपीय देश श्रीलंका के लिए हिन्दी के जितने भी मुहावरे प्रयोग किए जाएं सब सही ही साबित होंगे। कूटनीतिक स्तर पर श्रीलंकाई सरकार कब क्या कदम उठाएगी, कुछ नहीं कहा जा सकता है। पिछले लंबे वक्त से जो श्रीलंका चीन के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने में लगा था, और भारत को नजरंदाज कर रहा था, लेकिन चीनी कर्ज में दबने के बाद अब पुन: श्रीलंका को  भारत की याद आ गई है। भारत में नया राजदूत नियुक्त करने के साथ श्रीलंका भारत के साथ सैन्य अभ्यास करने एवं आतंक रोधी ५० मिलियन क्रेडिट को उपयोग करने की तैयार कर रहा है, जो दिखाता है कि चीन से कर्ज का दबाव श्रीलंका पर तगड़ी चोट कर रहा है, जिससे उसे अपना हित साधने के लिए  भारत के आगे झुकना पड़ रहा है।
श्रीलंका एक ऐसा देश है, जिसकी विदेश नीति के संबंध में यदि पलटू शब्द का प्रयोग किया जाए, तो निश्चित ही वो गलत नहीं होगा। पिछले एक साल में ही श्रीलंका के सुर अनेकों बार बदलते दिखें हैं। भारत के लिए श्री लंका के राजदूत के तौर पर मिलिंद मोरागोडा की नियुक्ती जनवरी, साल २०२० में हुई थी, लेकिन उन्होंने भारत में अपना कार्यभार ३० अगस्त २०२१ में संभाला था, और आते ही अब वो एकीकृत देश की रणनीति तैयार कर रहे थे। श्रीलंकाई उच्चायुक्त भारतीय सेना के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करने की तैयारी कर रहा है। इतना ही नहीं, भारत के आतंक रोधी ५० मिलियन डॉलर फंड के उपयोग को बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं।
 खास बात ये है कि वो अपने रक्षा सलाहकारों के साथ एक विशेष मसौदा तैयार कर रहे हैं। चीन के साथ राजपक्षे परिवार की करीबी के बाद भारत एव श्रीलंका के रिश्तों में विश्वास की भारी कमी देखी गई थी। इसके चलते अब राष्ट्रपति राजपक्षे गोटाबाया ने भारत से कूटनीतिक रिश्तों को बहाल करने की तैयारी कर रहा था। ऐसा प्रतीत होता है कि नए उच्चायुक्त मकसद ही भारत के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करने का है जिससे दोनों ही देशों के बीच द्विपक्षीय रिश्ते पटरी पर आ सकें।
 भारत से कूटनीतिक रिश्तों को सकारात्मकता पर लाने के लिए ही श्रीलंका भारतीय सेना के साथ सैन्य युद्धाभ्यास की तैयारी कर रहा है। भारत ने आतंकवाद विरोधी गतिविधियों के लिए २०१९ में ५० मिलियन के क्रेडिट का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इसका अब तक श्रीलंका द्वारा कोई खास प्रयोग नहीं किया गया और अब भारत से संबंध मजबूत करने के लिए ही तैयार मसौदे में इस क्रेडिट को खर्च करने की बात भी की गई है।
श्रीलंका द्वारा तैयार ये मसौदा इस बात को स्वीकार करता है, कि दोनों के बीच विश्वास की बेहद कमी है, किन्तु अब श्रीलंका इन कूटनीतिक रिश्तों को पटरी पर लाना चाहता है, जिससे क्षेत्र में दोनों देशों की एकता का प्रभाव बना रहे। अब सवाल ये उठता है कि अचानक चीन प्रेमी श्रीलंका भारत से कैसे करीबियां बढ़ाने लगा। हाल ही में श्रीलंका ने दोबारा चीन से एक बड़ा कर्ज लिया है, जिसके बाद चीन का श्री लंका पर दबाव पहले से कहीं अधिक हो गया है और ये देश चीन से कर्ज लेने की गलतियों को बार बार दोहरा रहा है।
चीन के लोन तले दबे होने के कारण पहले ही श्री लंका अपना हंबनटोटा का समुद्री इलाका गंवा चुका है, ऐसे में उसे पता है कि दोबारा लोन लेकर नई मुसीबत मोल ले ली हैं, जिसके चलते अब वो भारत से नजदीकियां बढ़ा रहा है। ऐसे में निश्चित तौर भारत फूंक फूंक कर कदम रखेगा, और श्रीलंका के जरिए चीन को भी सबक सिखाएगा।

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