June 19, 2021

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हमीरपुर में आर्थिक तंगी से जूझ रहा जूती उद्योग, लॉकडाउन में लाखों रुपये का लगा झटका

Hamirpur News: हमीरपुर में आर्थिक तंगी से जूझ रहा जूती उद्योग, लॉकडाउन में लाखों रुपये का लगा झटका

हमीरपुरउत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में नागरा जूती उद्योग आर्थिक तंगी से उबर नहीं पा रहा है। लॉकडाउन से जूती उद्योग में लगातार ताले लटकने से कम से कम बीस लाख रुपये का झटका लगा है। इस उद्योग की जूतियों की तूती उत्तर प्रदेश के अलावा मध्यप्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, बिहार, पंजाब और अन्य राज्यों में भी बोलती है।हमीरपुर जिला मुख्यालय से 16 किमी दूर कानपुर-सागर नेशनल हाइवे-34 पर भरुआ सुमेरपुर स्थित है। यहां जूती उद्योग की शुरुआत वर्ष 1952 से हुई थी। किसी समय यहां उद्योग कुटी के रूप में चल रहे थे, लेकिन अब जूती उद्योग कुछ दर्जन लोग ही पुश्तैनी कारोबार के रूप में चला रहे हैं। इस उद्योग से जुड़े लोगों को कोरोना संक्रमण काल में तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। नागरा जूती उद्योग के कारोबार से जुड़े दिनेश, संतोष, श्याम बाबू, दशरथ और सर्वेश सहित तमाम लोगों ने बताया कि जूती उद्योग के लिए अलग मार्केट खुलवाकर उद्यमियों को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए तो यहां अत्याधुनिक तरीके से भी जूती बनाई जा सकती है।

अभी किराये की दुकानों में ही जूती उद्योग का कारोबार चल रहा है। जूती उद्योग से जुड़े वंश गोपाल ने बताया कि इस साल शादी बारातों में जूतियों की जमकर खरीदारी होती, लेकिन कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण उद्योग बंद रहे।40 ग्राम वजन की जूती पहनकर चलने से निकलती है आवाजेंजूती उद्योग के प्रमुख कारोबारी वंश गोपाल ने बताया कि यहां की नागरा जूती बड़ी ही हल्की होती हैं, जो 40 ग्राम वजन से भी कम होती है। इसे पहनकर चलने में जूती से चर्र-चर्र की आवाज निकलती है। ये जूती हरियाणा और राजस्थान में ज्यादा लोग पसंद करते हैं। यह जूती राजस्थान की कला से प्रभावित नजर आती है। इसका अगला हिस्सा अंग्रेजी के वी आकार का होता है, जबकि जूती का पिछला हिस्सा पान के पत्ते जैसा होता है। जूतियां पूरी तरह से हाथ से ही बनायी जाती हैं।

साहूकारों से लिया कर्जजूती उद्योग चलाने वालों ने साहूकारों के कर्ज से कारोबार शुरू किया था, लेकिन लॉकडाउन में कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। वंश गोपाल और संतोष कुमार ने बताया कि किराये की दुकान में जूती बनाने का कारोबार उनके पिता विजय कुमार ने वर्ष 1980 से शुरू किया था। यह कारोबार पुश्तैनी है, जिससे रोजाना की पांच सौ आठ सौ रुपये की आमदनी हो जाती है, लेकिन लॉकडाउन में उद्योगों में ताले पड़ने से भारी नुकसान उठाना पड़ा। बरसात में तो ये उद्योग मंदे पड़ जाते हैं।वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट से जूती उद्योग को लगेंगे पंखजूती उद्योग के कारोबार से जुड़े दिनेश और वंशगोपाल ने बताया कि सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट में यहां की जूती उद्योग को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं शुरू की हैं, जिससे आने वाले समय में यहां की नागरा जूतियों की तूती विदेशों में बोलेगी। बताया कि कई लोगों को जूती उद्योग को रफ्तार देने के लिए इस योजना में दो-दो लाख रुपये का ऋण भी मिला है। जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक केपी वर्मा ने बताया कि जूती उद्योग को नये आयाम देने के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में 11 कारोबारियों को लोन दिलाए गए हैं।

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