June 15, 2021

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कोरोना से ठीक हुए मरीज शंख बजाकर फेफड़ों को कर रहे मजबूत,

कोरोना से ठीक हुए मरीज शंख बजाकर फेफड़ों को कर रहे मजबूत, धार्मिक, वास्तु और स्वास्थ्य के लिए है लाभकारी

सुमित शर्मा, कानपुरसनातन धर्म में शंख के बिना धार्मिक अनुष्ठान अधूरे माने जाते हैं। शंख के अनेक फायदे हैं। शंख की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है। सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह धार्मिक, वास्तु और स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी है। अब इसका लाभ कोरोना से स्वस्थ्य होने वाले मरीज भी उठा रहे हैं। कोरोना से कमजोर हुए फेफड़ो में शंख नई जान फूंकने का काम कर रहा है।कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर में वायरस ने इंसानी फेफड़ों को खोखला कर दिया है। संक्रमित मरीज के शरीर में ऑक्सिजन की कमी होने से फेफड़े कमजोर हो गए हैं। फिजियोथेरेपिस्ट कोरोना से स्वस्थ्य हुए मरीजों को नियमित रूप से शंख बजाने और योग करने की सलाह दे रहे हैं। कोरोना से स्वस्थ मरीजों को हो रहीं ये दिक्कतेंकोरोना से ठीक होने वाले मरीजों के फेफड़े बहुत ज्यादा कमजोर हो जाते हैं।

कमजोर फेफड़ों में दोबारा इंफेक्शन फैलने का खतरा बना रहता है। जिसकी वजह से मरीजों में सांस फूलने की समस्या सामने आ रही है। इसके साथ ही लंबे समय तक अस्पताल और घर में समय व्यतीत करने की वजह से मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति में शंख बजाने और बैलून फुलाने से फेफड़े मजबूत होते हैं और उनकी क्षमता बढ़ती है।Kanpur News: कानपुर में तीसरी लहर से जंग की खास तैयारी, नहीं होगी बेड और ऑक्सिजन की कमी!प्वाइंट में जाने शंख के फायदेनियमित शंख बजाने से पेट की एक्सरसाइज होती है, जिससे गैस की समस्या दूर होती है। पेट के मसल्स फूलते और पिचकते हैं।शंख बजाने से बीपी की समस्या नहीं होती है। दिमाग और शरीर में रक्त का संचार बेहतर रहता है। मानसिक तनाव से निजात मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।शंख बजाने से फेफड़े को मजबूती मिलती है, कोरोना काल में सबसे कारगार थेरेपी साबित हुई है।शंख बजाने से चेहरे के मसल्स में खिंचाव और कंपन्न होता है। जिससे चेहरे की चमक बढ़ती है और झुर्रियों की समस्या दूर होती है।शंख की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है और हवा में मौजूद बैक्टीरिया नष्ट होती है।

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