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कानपुर: जिला पंचायत सदस्य चुनाव में SP ने BJP को दी शिकस्त… निर्दलीय सदस्यों के हाथ में अध्यक्ष की चाभी

कानपुर: जिला पंचायत सदस्य चुनाव में SP ने BJP को दी शिकस्त... निर्दलीय सदस्यों के हाथ में अध्यक्ष की चाभी

सुमित शर्मा, कानपुरजिला पंचायत सदस्य के चुनावों में समाजवादी पार्टी की साइकिल ने एक बार फिर से रफ्तार पकड़ी है। वहीं, बीएसपी का मतवाला हाथी भी किसी से पीछे नहीं रहा। पूर्ण बहुमत से जिला पंचायत अध्यक्ष का दावा करने वाली बीजेपी 32 में से 8 सदस्य कमल खिलाने में कामयाब हो सके। जिला पंचायत सदस्य के चुनावी परिणाम सोमवार देरशाम तक आते रहे, जिसमें एसपी के 11 सदस्यों ने जीत हासिल की। बीएसपी के 5 सदस्य, 7 निर्दलीय और एक निषाद पार्टी समर्थित प्रत्याशी को जीत मिली है।जिला पंचायत सदस्यों के चुनावी परिणाम आने के बाद सियासी दलों में जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गई। एसपी और बीजेपी दोनों ही पार्टियां इस बात को जानती हैं कि बिना समर्थन के किसी भी पार्टी का जिला पंचायत अध्यक्ष बनना मुस्किल है। एसपी और बीजेपी दोनों ही दल निर्दलीय सदस्यों पर डोरे डाल रहे हैं। बीजेपी जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दावा ठोंक रही है, जबकि उसके 8 सदस्यों ने जीत दर्ज की है।अध्यक्ष पद के लिए बहुमत का आकड़ा 17 हैकानपुर में जिला पंचायत सदस्य की 32 सीटें हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने के लिए बहुमत के आकड़े को छूना पड़ेगा। एसपी और बीजेपी दोनों ही दल निर्दलीय सदस्यों और बीएसपी के सदस्यों में सेंधमारी कर 17 बहुमत के आकड़े तक पहुंचने की फिराक में है।सपा को 06 और भाजपा को 09 सदस्यों की जरूरतजिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए किसी भी पार्टी के पास पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन एसपी का जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए 06 समर्थकों की जरूरत है, लेकिन बीजेपी का रास्ता इतना आसान नहीं है। बीजेपी को बहुमत के आकड़े तक पहुंचने के लिए 09 सदस्यों की जरूरत है। बीजेपी और एसपी दोनों ही दल निर्दलीय सदस्यों में सेंधमारी करने में जुटे हैं। बीजेपी को यदि बहुमत तक पहुंचना है तो बीएसपी सदस्यों को भी अपने पाले में लाना पड़ेगा।कमल रानी वरुण की बेटी स्वप्निल वरुण का नाम अध्यक्ष पद में आगेप्रदेश सरकार में मंत्री रहीं कमलरानी वरुण की बेटी स्वप्निल वरुण गिरसी से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीत गई हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। अध्यक्ष पद के लिए उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है, लेकिन अंतिम फैसला प्रदेश नेतृत्व को करना है।