Lok Shakti.in

Nationalism Always Empower People

UP Panchayat Chunav: विकास दुबे की मौत के बाद बिकरू में लोकतंत्र का हुआ उदय, 25 साल बाद दावेदार कर रहे खुलकर प्रचार

UP Panchayat Chunav: विकास दुबे की मौत के बाद बिकरू में लोकतंत्र का हुआ उदय, 25 साल बाद दावेदार कर रहे खुलकर प्रचार

सुमित शर्मा, कानपुरकुख्यात अपराधी विकास दुबे के बिकरू गांव में लोकतंत्र की बयार बह रही है। पंचायत चुनाव में 25 साल बाद पहली बार ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है। ग्राम प्रधान पद के लिए नामांकन कराने वाले दावेदार खुलकर प्रचार कर रहे। ग्रामीणों से गांव का विकास कराने का वादा कर रहे हैं। दीवारों पर पोस्टर पंप्लेट चस्पा हैं। विकास दुबे के रहते इस तहर से चुनाव कभी नहीं हुआ है। विकास दुबे की मौत के बाद बिकरू गांव में लोकतंत्र का उदय हुआ है। हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे ने बीते 2 जुलाई की रात अपने गुर्गों के साथ मिलकर सीओ समेत 08 आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। 10 जुलाई को यूपी एसटीएफ और कानपुर पुलिस ने विकास दुबे को एनकांउटर में मार गिराया था। विकास दुबे की मौत के बाद ही बिकरू गांव में लोकतंत्र ‘जिंदा’ हो गया था। पंचायत चुनाव 2021 बिकरू गांव के लिए नया सबेरा लेकर आया है।25 साल बाद 10 दावेदार आए सामनेबिकरू ग्रामसभा में 25 साल बाद प्रधान पद के 10 दावेदार सामने आए हैं। दुर्दांत अपराधी विकास दुबे की ग्रामीणों में इस कदर दहशत थी कि कोई भी दावेदार खड़ा नहीं होता था। विकास जिसको चाहता था, उसको निर्विरोध चुनाव जितवाता था। इसके साथ ही विकास जिसे कहता था, ग्रामीण उसे ही वोट देते थे। विकास की मौत के बाद ग्रामीण आजादी महसूस कर रहे हैं। अब वो जिसको चाहें उसको वोट कर सकते है, अपनी मर्जी का प्रधान चुन सकते हैं।अनुसूचित जाति जनजाति का होगा प्रधानपंचायत चुनाव 2021 में बिकरू गांव से अनुसूचित जाति जनजाति का प्रधान होगा। बिकरू ग्रामसभा में डिब्बानिवादा मजरा आता है। गांव की आबादी लगभग 800 है। बिकरू गांव में 7 दावेदारों और मजरा डिब्बानिवादा से 3 दावेदारों ने नामांकन किया है। सभी दावेदार पूरी ताकत से चुनाव के प्रचार-प्रसार में लगे हैं। वहीं, विकास के परिवार ने पंचायत चुनाव से दूरी बना रखी है।विकास दुबे 1995 में पहली बार बना था प्रधानकुख्यात अपराधी विकास दुबे चौबेपुर विधानसभा क्षेत्र से दबंग विधायक रहे हरिकिशन श्रीवास्तव के संपर्क में आया था। विकास ने विधायक हरिकिशन श्रीवास्तव के लिए काम करना शुरू कर दिया था। विधायक के जो काम कोई नहीं कर पाता था, उस काम को विकास चुटकियों में कर देता था। जमीनों में कब्जा करना, रंगदारी वसूलना इस तरह के कामों से विकास विधायक का करीबी बन गया। राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाते हुए 1995 में विकास दुबे बिकरू गांव से ग्राम प्रधान चुना गया।25 वर्षों में कौन-कौन बना प्रधानहिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का जैसे-जैसे कद बढ़ता गया। उसकी जड़ें मजबूत होती चली गईं। विकास जिसको चाहता था, उसको ग्राम प्रधान बनाता था। 1995 में विकास दुबे पहली बार ग्राम प्रधान चुना गया था। चुनाव जीतने के बाद लोकतंत्र की चाभी उसके हाथ लग गई। सन् 2000 में अनुसूचित जाति की सीट होने पर विकास ने गांव की गायत्री देवी को प्रत्याशी बनाया था।गायत्री देवी चुनाव जीत कर प्रधान बन गई। 2005 में जनरल सीट होने पर विकास के छोटे भाई दीपक की पत्नी अंजली को निर्विरोध प्रधान चुना गया। सन 2010 में बैकवर्ड सीट होने पर विकास ने रजनीश कुशवाहा को मैदान में उतारा था। रजनीश कुशवाहा ग्राम प्रधान चुना गया। 2015 में अंजली दुबे दोबारा निर्विरोध ग्राम प्रधान चुनी गई थी। प्रधान कोई भी बने, लेकिन उसकी चाभी विकास के हाथों में रहती थी।