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बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर में पाषाण काल के औजार-अवशेष और बौद्ध काल से पहले की सभ्यता मिली

बुंदेलखंड क्षेत्र के हमीरपुर में पाषाण काल के औजार-अवशेष और बौद्ध काल से पहले की सभ्यता मिली

हाइलाइट्स:36 गांवों में सर्वे के दौरान 6 हजार साल पुराने हड्डी, लाक की चूड़ियां और लौह उपकरण देख अधिकारी दंगचंदेल काल में जमीन के नीचे ग्रेनाइट पत्थर से बना मंदिर अब आया राजकीय संरक्षण के दायरे मेंपुरातात्विक सर्वेक्षण में मिली प्राचीन धरोहरों और पाषाण काल के औजार और अवशेषों पर शोध किया जायेगापंकज मिश्रा, हमीरपुरउत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में पुरातत्व विभाग की टीम ने तीन दर्जन गांवों का सर्वे कर पाषाण काल के उपकरण, हड्डी, लाक की चूड़ियां और लौह उपकरणों के अलावा लौह मल सहित पकी मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं। यह अवशेष 6000 साल पुराने हैं, जिन्हें पुरातत्व विभाग ने अपने कब्जे में ले लिया है। सर्वे में ऐसे तीन गांव भी मिले हैं, जहां बौद्ध काल के पहले से ही सभ्यता विद्यमान थी। चन्देल काल में जमीन के नीचे ग्रेनाइट पत्थर से बने मंदिर को राजकीय संरक्षण में लेने की कार्यवाही भी विभाग ने शुरू कर दी है।बुंदेलखंड क्षेत्र के पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे के नेतृत्व में राहुल राजपूत और संदीप कुमार सहित अन्य कर्मियों की टीम ने हमीरपुर जिले के मुस्करा विकास खंड क्षेत्र के 36 गांवों का सर्वे किया है। सर्वे एक माह तक चला, जिसमें 6000 साल पुराने पत्थर के औजार और अन्य पुरातात्विक महत्व की धरोहरें मिली हैं।बारहवीं शताब्दी की जैन तीर्थकर की मिली अद्भुत प्रतिमाक्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि अलरा गौरा से 12वीं सदी की जैन तीर्थकर की पद्मासनस्थ भग्न प्रतिमा सर्वे के दौरान मिली है। वहीं, ऐझी गांव से मध्यकालीन पत्थर से निर्मित अस्पष्ट प्रतिमाएं भी मिली हैं। उत्तर मध्यकालीन तालाब एवं ईंटों से निर्मित मंदिर भी देखा गया है, जो पुरातत्व की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। इमिलिया गांव में उत्तर मध्यकालीन भव्य मंदिर और गणेश की प्रतिमा तथा उमरी गांव में पूर्ण मध्यकालीन प्रतिमाओं के भग्न भाग एवं ईंटों से निर्मित उत्तर मध्यकालीन भव्य मंदिर भी भग्नावस्था में पाया गया है। कंधौली में पूर्व मध्यकाल में निर्मित विष्णु प्रतिमा, हनुमान की अस्पष्ट प्रतिमा का शीर्ष भाग, उत्तर मध्यकालीन सतीपट्ट और करगांव से प्राचीन टीला सर्वे में मिला है। यहां मध्यकालीन वीरपट्ट भी मिला है।उत्तर मध्यकालीन रामजानकी मंदिर और प्राचीन टीला में मिले पाषाण औजारबुंदेलखंड क्षेत्र के पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि चिल्ली गांव की सीमा में स्थित प्राचीन टीले से कृष्ण लेपित पके बर्तन, काला, लाल बर्तन और समकालीन लाल मिट्टी के बर्तनों के अवशेष देखे गए हैं। यहां हनुमान की मध्यकालीन प्रतिमा एवं मध्यकालीन रामजानकी मंदिर भी सर्वे में मिला है। जल्ला गांव में पूर्व मध्यकालीन प्रतिमाओं की धरोहरें मिली हैं। इनमें विष्णु की प्रतिमा का ऊर्ध्व भाग स्पष्ट रूप से देखा गया है। बताया कि तगारी गांव में प्राचीन टीला से पाषाण औजार, हड्डी, एवं लाक की चूड़ियां, लौह उपकरण और लौह मल तथा लाल बर्तनों के अवशेष पुरातत्व की दृष्टि से बड़े ही महत्वपूर्ण हैं। गांव की सीमा में पूर्व मध्यकालीन पत्थर से निर्मित मंदिर स्थित जहां प्रांगण में समकालीन दो भव्य शिव लिंग सर्वे दौरान देखे गए हैं। नव पाषाण कालीन एक सेल्ट और लाल बर्तनों के भी मिले अवशेषपुरातत्व अधिकारी के मुताबिक, न्यूरिया गांव के बाहर स्थानीय नाले के दोनों ओर स्थित प्राचीन टीला से नव पाषाण कालीन एक सेल्ट और लाल बर्तनों के अवशेष पाए गए हैं। टीले के निकट आधुनिक मंदिर में शिवलिंग तथा पूर्व मध्यकालीन प्रतिमाओं के खंडित भाग पड़े पाए गए हैं। गांव में उत्तर मध्यकालीन वीर पट्ट भी देखा गया है। वहीं, लोदीपुर निवादा में प्राचीन टीले से मध्यकालीन धरोहरें तथा मध्यकालीन मंदिर स्थित है। पहाड़ी भिटारी में प्राचीन टीला और भव्य धरोहरों के अलावा बड़े-बड़े सकोरे और सुपाड़ीनुमा मनके मिले हैं। चंदेलकाल में ग्रेनाइट से निर्मित मंदिर भी भूतल से नीचे निर्मित है। मंदिर के गर्भगृह और सोलह स्तंभों पर मंडप बना है। यहां उत्तर मध्यकालीन गढ़ी के भी अवशेष और सती पट्ट पुरातत्व की नजर में खास है।बेतवा नदी की घाटी में बसे गांव में टीले से मिले लघु पाषाण उपकरणपुरातत्व विभाग की टीम के सर्वे में बेतवा नदी की घाटी में बसे बजेहटा दरिया गांव में प्राचीन टीले से लघु पाषाण काल के उपकरण तथा मध्यकालीन लाल मिट्टी के बर्तनों के अवशेष पाए गए हैं, जिन्हें शोध के लिए राजकीय संग्रहालय में रखा गया है। यहां भी मध्यकालीन मंदिर और सतीट्ट देखे गए हैं। बसवारी में पूर्व मध्यकालीन शिवलिंग, हनुमान की भव्य प्रतिमा, उत्तर मध्यकालीन चतुर्मुख शिवलिंग स्थित है। बांधुर बुजुर्ग गांव में एक प्राचीन टीला मिला है। बांधुर खुर्द गांव में मंदिरों और प्रतिमाओं के अलावा अंजनी माता की अद्भुत प्रतिमा मिली है। भटरा गांव से प्राचीन टीले में पाषाण काल के उपकरण औजार और लाल मिट्टी के पके बर्तनों के अवशेष पाए गए हैं। मुस्करा में चंदेलकालीन मंदिर स्थित है जो ग्रेनाइट पत्थर व शिखर निर्माण ईंटों से हुआ है।चंदेलकाल में ग्रेनाइट पत्थर से बना मंदिर होगा राजकीय संरक्षण के आधीनक्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी झांसी डॉ. एसके दुबे ने गुरुवार को बताया कि हमीरपुर जिले के मुस्करा ब्लाक के 36 गांवों में पुरातात्विक सर्वेक्षण से इस बात की पुष्टि हो गई है कि यहां पाषाण काल से ही मानव निवास करता आया है। इसके अलावा सर्वेक्षण में तीन ऐसे गांव मिले हैं, जहां बौद्ध काल के पहले से ही मानव सभ्यता विद्यमान थी। बताया कि ग्रामों में चंदेलकाल तथा परवर्ती काल के पुरातात्विक अवशेष और धरोहरें मिली हैं, दो बहुत ही महत्वपूर्ण है। पहाड़ी भिटारी में चंदेल काल में जमीन के नीचे ग्रेनाइट पत्थर से बना मंदिर पुरातत्व की नजर में बहुत ही खास है। जिसे अब राजकीय संरक्षण में लिए जाने की कार्यवाही शुरू कर दी गई है। पुरातात्विक सर्वेक्षण में मिली प्राचीन धरोहरों और पाषाण काल के औजार और अवशेषों पर शोध किया जायेगा।